चतुर किसान और लालची साहूकार


एक छोटे से गाँव में एक गरीब लेकिन चतुर किसान रहता था। वह अपनी मेहनत और ईमानदारी के लिए जाना जाता था। वहीं, उसी गाँव में एक लालची साहूकार भी था, जो गरीब लोगों को धोखा देकर उनका धन हड़पने की कोशिश करता था।

कहानी की शुरुआत

एक दिन, किसान को अपनी जमीन के लिए कुछ पैसों की जरूरत पड़ी। उसने साहूकार से मदद मांगी। साहूकार ने कुटिल मुस्कान के साथ कहा, "मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा, लेकिन बदले में तुम्हें अपनी जमीन गिरवी रखनी होगी। अगर समय पर पैसे नहीं लौटाए, तो जमीन मेरी हो जाएगी।"

किसान ने शर्त मान ली क्योंकि उसे पैसे की सख्त जरूरत थी। उसने साहूकार से वादा किया कि वह एक साल के अंदर सारा कर्ज चुका देगा।

साहूकार की चालाकी

साल बीतने से पहले ही साहूकार ने योजना बनाई कि वह किसान से उसकी जमीन हड़प लेगा। उसने किसान से कहा, "तुमने वादा किया था कि समय पर कर्ज चुका दोगे, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि तुम इसे पूरा कर पाओगे। मैं तुम्हें एक प्रस्ताव देता हूँ: अगर तुम मेरी तीन पहेलियों का सही जवाब दे दो, तो तुम्हारा कर्ज माफ कर दूंगा। लेकिन अगर तुम असफल रहे, तो तुम्हारी जमीन मेरी हो जाएगी।"

किसान को साहूकार की चाल समझ में आ गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और चुनौती स्वीकार कर ली।

पहली पहेली

साहूकार ने पूछा, "बताओ, ऐसी कौन सी चीज है जो हमेशा बढ़ती है, लेकिन कभी पीछे नहीं जाती?"
किसान ने तुरंत जवाब दिया, "समय।"
साहूकार चकित रह गया, लेकिन उसने दूसरी पहेली पूछी।

दूसरी पहेली

"ऐसा क्या है जो पानी में गिरने पर डूबता नहीं?"
किसान मुस्कुराया और बोला, "परछाईं।"
साहूकार का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने तीसरी और आखिरी पहेली पूछी।

तीसरी पहेली

"ऐसी कौन सी चीज है जिसे तुम जितना ज्यादा लोगे, वह उतना ही छोटी होती जाएगी?"
किसान ने आत्मविश्वास से कहा, "सांस।"

किसान की जीत

साहूकार के पास कोई और सवाल नहीं बचा। उसे मजबूर होकर किसान का कर्ज माफ करना पड़ा। पूरा गाँव किसान की चतुराई की तारीफ करने लगा, और साहूकार की लालच का अंत हो गया।

संदेश:
चतुराई और धैर्य से बड़ी से बड़ी समस्या को हल किया जा सकता है।


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