प्रेम ही भगवान है


एक गांव में जगत नाम का एक बनिया रहता था। सड़क के किनारे उसकी छोटी सी दुकान थी। वह वहां कई सालों से रह रहा था, इसीलिए गांव के सभी लोग उसे अच्छी तरह जानते थे। जगत अपने व्यवहार और प्रेम के लिए प्रसिद्ध था। वह हर किसी से प्यार करता था और सबके साथ अच्छा व्यवहार करता था।

जगत की दुकान पर अक्सर गांव के लोग अपनी जरूरत का सामान लेने आते थे। कोई गरीब होता तो जगत बिना पैसे लिए ही उसकी मदद करता। वह अक्सर कहा करता था, "पैसे तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन इंसानियत और प्रेम हमेशा रहता है।"

एक दिन की बात

गांव में एक बूढ़ा साधु आया। वह बहुत थका हुआ और भूखा था। उसने गांव में कई जगह खाना मांगा, लेकिन किसी ने उसे कुछ नहीं दिया। निराश होकर वह जगत की दुकान पर पहुंचा। जगत ने उसे देखा और तुरंत उसे बैठने को कहा।

"बाबा, आप भूखे लग रहे हैं। बैठिए, मैं आपके लिए कुछ खाने का इंतजाम करता हूं," जगत ने मुस्कुराते हुए कहा।

जगत ने साधु को खाना परोसा और अपने घर से गर्म कपड़े भी लाकर दिए। साधु ने खाना खाया और बहुत खुश हुआ। उसने जगत से कहा, "बेटा, तूने जो प्रेम और दया दिखाई है, वह दुर्लभ है। तू सचमुच भगवान का रूप है।"

जगत ने विनम्रता से जवाब दिया, "बाबा, मैं भगवान नहीं हूं। मैं तो सिर्फ उनका दिया हुआ प्रेम बांट रहा हूं।"

साधु का आशीर्वाद

साधु ने जाते-जाते कहा, "जगत, तेरा यह प्रेम तुझे हमेशा सुखी रखेगा। याद रखना, भगवान वहां बसते हैं जहां प्रेम होता है।"

उस दिन के बाद गांव के लोग और भी ज्यादा जगत का सम्मान करने लगे। साधु के शब्द पूरे गांव में फैल गए। लोग समझ गए कि सच्चा भगवान वही है, जो प्रेम और दया के रूप में प्रकट होता है।

जगत ने अपनी पूरी जिंदगी उसी भावना से बिताई और सभी के दिलों में अमर हो गया।

शिक्षा:
प्रेम और दया सबसे बड़ा धर्म है। जो दूसरों की मदद करता है, वही सच्चे भगवान को पा लेता है।

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