सोने की चिड़िया

बहुत पुराने ज़माने की बात है। एक राजा था जिसका नाम विक्रम था। वह अपने न्याय और उदारता के लिए प्रसिद्ध था। राजा के महल में एक बहुत ही सुंदर बाग था। उस बाग में तरह-तरह के फूल खिलते थे और कई प्रकार के मीठे फलों के पेड़ थे। लेकिन उस बाग की सबसे अनोखी बात थी एक विशेष पेड़, जिसमें सोने के सेब लगते थे। यह पेड़ पूरे राज्य के लिए गर्व का प्रतीक था।

हर रात राजा के सैनिक उस पेड़ की सुरक्षा के लिए तैनात रहते थे क्योंकि सोने के सेब बहुत ही बहुमूल्य थे। लेकिन एक दिन, सुबह जब राजा बाग में टहलने गए, तो उन्होंने देखा कि पेड़ से एक सोने का सेब गायब है। राजा को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने तुरंत अपने सैनिकों को बुलाकर पूछा, "यह सेब कैसे गायब हुआ?" सैनिक कुछ नहीं कह पाए क्योंकि उन्होंने कुछ भी अजीब नहीं देखा था।

राजा ने आदेश दिया कि अगले दिन से पहरा और सख्त किया जाए। लेकिन अगले दिन भी एक और सेब गायब हो गया। अब राजा ने खुद रात में पेड़ के पास छिपकर निगरानी करने का फैसला किया। आधी रात को राजा ने देखा कि एक सुनहरी चिड़िया पेड़ पर आई और उसने एक सोने का सेब अपनी चोंच में लिया और उड़ गई।

राजा चौंक गए और अगले दिन अपने मंत्रियों और सैनिकों से इस घटना के बारे में बात की। उन्होंने कहा, "हमें इस सुनहरी चिड़िया को पकड़ना होगा। यह राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।" राजा ने अपने तीन बेटों को बुलाया और उन्हें चिड़िया को पकड़ने का आदेश दिया।

पहले दिन, सबसे बड़े बेटे ने कोशिश की। वह रातभर पेड़ के पास पहरा देता रहा, लेकिन जैसे ही चिड़िया आई, वह घबरा गया और चिड़िया उड़ गई। अगले दिन, मंझले बेटे ने कोशिश की, लेकिन वह भी असफल रहा।

अब सबसे छोटे बेटे की बारी थी। वह बहुत समझदार और धैर्यवान था। उसने अपनी बुद्धिमानी से एक योजना बनाई। उसने चिड़िया को पेड़ पर आते देखा और धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ा। उसने ध्यान से चिड़िया को पकड़ लिया। चिड़िया ने कहा, "मुझे छोड़ दो, मैं तुम्हारे राज्य को अमीर बना दूंगी।"

छोटे बेटे ने चिड़िया को राजा के पास ले जाकर यह बात बताई। चिड़िया ने कहा, "राजन, मैं एक जादुई चिड़िया हूं। अगर आप मेरी देखभाल करेंगे और मुझे स्वतंत्र रूप से उड़ने देंगे, तो मैं आपके राज्य को सोने से भर दूंगी।"

राजा ने उसकी बात मानी और चिड़िया को आज़ादी दे दी। इसके बाद, चिड़िया हर दिन सोने के सेब और बहुमूल्य रत्न लाकर बाग में रखती। राजा का राज्य और भी अमीर और खुशहाल हो गया।

इस तरह, सुनहरी चिड़िया ने न केवल राज्य को धन दिया बल्कि राजा और उनके परिवार को यह सिखाया कि कभी-कभी आज़ादी और विश्वास ही सच्चा खजाना होता है।
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