यह कहानी एक छोटे से गाँव की है, जहाँ एक पुराना और खंडहरनुमा घर स्थित था। उस घर को लेकर गाँव में कई डरावनी कहानियाँ प्रचलित थीं। लोगों का कहना था कि उस घर में रात को अजीब आवाजें आती थीं और जो भी वहां गया, वापस नहीं लौटा।
खंडहर का रहस्य
गाँव का एक युवक, राहुल, बहुत साहसी और जिज्ञासु था। उसने तय किया कि वह इस घर के रहस्य का पता लगाएगा। एक रात, जब पूरा गाँव सो रहा था, राहुल एक टॉर्च और कुछ सामान लेकर खंडहर की ओर चल पड़ा।
घर के पास पहुँचते ही माहौल अचानक बदल गया। हवा ठंडी हो गई, चारों ओर अजीब-सी खामोशी छा गई। राहुल ने घर का दरवाजा धकेला, जो एक डरावनी चरमराहट के साथ खुला। अंदर घुप्प अंधेरा था।
राहुल ने अपनी टॉर्च जलाकर चारों ओर देखा। दीवारों पर पुराने चित्र लगे थे, जो समय के साथ फीके और विकृत हो चुके थे। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, तभी उसे लगा कि कोई उसके पीछे है। उसने मुड़कर देखा, पर वहाँ कोई नहीं था।
वह सीढ़ियों से ऊपर जाने लगा। सीढ़ियों पर हर कदम के साथ उसे लगा कि पीछे से किसी के कदमों की आवाज आ रही है। अचानक, एक दरवाजा अपने आप खुल गया। अंदर से ठंडी हवा का झोंका आया।
राहुल ने हिम्मत करके दरवाजे के अंदर कदम रखा। यह एक कमरा था, जिसमें एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी पड़ी थी। कुर्सी पर एक फटे-पुराने कपड़े में लिपटा हुआ कुछ रखा था। राहुल ने टॉर्च की रोशनी उस पर डाली।
जैसे ही वह पास गया, वह कपड़ा हिलने लगा। राहुल के रोंगटे खड़े हो गए। अचानक, कपड़े से एक महिला का चेहरा प्रकट हुआ, जिसकी आँखें चमक रही थीं। वह जोर से चीखी और राहुल की ओर झपटी।
राहुल के होश उड़ गए। उसने अपनी टॉर्च और सामान वहीं फेंका और भागने की कोशिश की। पर दरवाजा अपने आप बंद हो गया। वह चीखते हुए बचने का रास्ता ढूंढने लगा। तभी एक गूंजती हुई आवाज आई, "तुमने मेरी नींद क्यों तोड़ी?"
अगली सुबह, गाँववालों ने देखा कि राहुल खंडहर के बाहर बेहोश पड़ा हुआ था। जब वह होश में आया, तो उसने डरते हुए सबकुछ बताया। उस दिन के बाद, राहुल ने कभी उस खंडहर की ओर रुख नहीं किया।
निष्कर्ष
गाँववालों का मानना था कि वह घर एक अभिशप्त आत्मा का बसेरा था। जो भी उसकी शांति भंग करता, उसे वह नहीं छोड़ती। खंडहर अब भी वहाँ खड़ा है, पर कोई भी उसके करीब जाने की हिम्मत नहीं करता।
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