एक छोटे से गाँव में रामलाल नाम का एक लालची सेठ रहता था। वह बहुत अमीर था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी लालच। वह हमेशा अधिक धन कमाने और दूसरों से कुछ न कुछ हड़पने के प्रयास में लगा रहता।
एक दिन, एक साधु गाँव में आया। साधु के पास एक चमकदार पत्थर था, जो अद्भुत रूप से चमक रहा था। साधु ने गाँव के लोगों को बताया कि यह पत्थर जादुई है और जो इसे धारण करेगा, उसे कभी धन की कमी नहीं होगी।
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यह सुनकर रामलाल का लालच बढ़ गया। उसने साधु को भोजन और विश्राम का प्रस्ताव दिया। साधु ने उसकी मेहमाननवाज़ी स्वीकार कर ली। जब साधु आराम कर रहा था, तो रामलाल ने उस जादुई पत्थर को चुपके से चुरा लिया।
रामलाल ने सोचा, "अब तो मैं सबसे अमीर इंसान बन जाऊंगा। यह पत्थर मेरी सारी इच्छाएँ पूरी कर देगा।" वह पत्थर को लेकर अपने घर भाग गया और उसे अपने कमरे में छुपा दिया।
अगली सुबह, रामलाल ने देखा कि पत्थर की चमक गायब हो गई थी। उसने उसे जोर से हिलाया, साफ किया, लेकिन पत्थर साधारण हो चुका था। घबराहट में वह साधु के पास गया और पूरी सच्चाई बता दी।
साधु मुस्कुराया और कहा, "यह पत्थर जादुई नहीं था। यह सिर्फ तुम्हारे लालच की परीक्षा लेने के लिए था। अगर तुमने इसे चुराने के बजाय ईमानदारी से मेरे पास लौटाया होता, तो मैं तुम्हें सही धन और सुख का रहस्य सिखाता। लेकिन तुम्हारा लालच तुम्हें धोखा दे गया।"
रामलाल को अपनी गलती पर गहरा पछतावा हुआ। उसने साधु से क्षमा मांगी और वादा किया कि वह अब लालच छोड़कर ईमानदारी का जीवन जिएगा।
सीख:
लालच हमेशा इंसान को गुमराह करता है। सच्चा सुख और धन केवल ईमानदारी और मेहनत से मिलता है।
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