यहाँ एक प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत है:
एक गाँव में एक बुजुर्ग संत रहते थे। उनके पास लोग अपनी समस्याएँ लेकर आते और समाधान मांगते। एक दिन एक युवक उनके पास आया और बोला, "मुझे सफलता का रहस्य बताइए। मैं बहुत मेहनत करता हूँ, लेकिन मुझे उसका फल नहीं मिलता।"
संत मुस्कुराए और बोले, "ठीक है, लेकिन पहले तुम मेरे लिए एक काम करो।" उन्होंने उसे एक चमकदार पत्थर दिया और कहा, "इसे बाजार में ले जाओ और इसका मूल्य पूछकर आओ, लेकिन इसे बेचना मत।"
युवक पत्थर लेकर बाजार गया। सबसे पहले उसने एक सब्जीवाले से पत्थर का मूल्य पूछा। सब्जीवाले ने कहा, "यह पत्थर मेरे काम का नहीं है, लेकिन अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें इसके बदले 10 रुपये दे सकता हूँ।"
फिर युवक एक सुनार के पास गया। सुनार ने पत्थर को ध्यान से देखा और कहा, "यह तो एक कीमती रत्न है। मैं इसके बदले तुम्हें 10,000 रुपये दे सकता हूँ।"
इसके बाद युवक एक रत्न विशेषज्ञ के पास गया। उसने पत्थर को देखा और आश्चर्यचकित होकर कहा, "यह तो अनमोल है। मैं इसके लिए करोड़ों रुपये देने को तैयार हूँ।"
युवक संत के पास वापस आया और सारी बातें बताई। संत ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारी सफलता भी इस पत्थर की तरह है। अगर तुम अपनी कीमत उन लोगों से पूछोगे जो तुम्हारी काबिलियत को नहीं पहचानते, तो वे तुम्हें कम आँकेंगे। लेकिन अगर तुम सही लोगों के पास जाओगे, तो वे तुम्हारी असली कदर करेंगे। सफलता पाने के लिए अपनी मेहनत को सही दिशा में लगाओ और अपनी कीमत पहचानो।"
युवक को अपनी गलती समझ आ गई और उसने संत का धन्यवाद किया।
शिक्षा:
अपनी क्षमता और काबिलियत को पहचानें। सही दिशा में मेहनत करें और सही लोगों के बीच अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें।
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