एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक बहुत प्यारी-सी हिरणी रहती थी। वह बहुत चंचल और घूमने-फिरने की शौकीन थी। वह किसी एक जगह पर अधिक दिनों तक नहीं रहती थी। दूसरे हिरनों की तरह उसे झुंड में रहना बिल्कुल पसंद नहीं था। इसी कारण वह सारा दिन जंगल में इधर-उधर घूमती रहती थी।
एक दिन वह हिरणी घूमते-घूमते नदी के किनारे आ पहुँची। नदी का पानी बहुत साफ था और उसके आसपास का वातावरण बेहद सुंदर था। हिरणी ने सोचा कि कुछ देर यहाँ आराम किया जाए और नदी का ठंडा पानी पिया जाए।
वह नदी के किनारे पानी पीने लगी। तभी उसकी नजर पानी में तैरती हुई एक छोटी-सी मछली पर पड़ी। मछली पानी में उछल-कूद कर रही थी। उसे देखकर हिरणी बहुत खुश हुई और मन ही मन सोचने लगी कि यह मछली कितनी सुंदर है।
तभी वहाँ एक चालाक सियार आ पहुँचा। उसने हिरणी को अकेले देखा तो उसके मन में एक बुरी योजना आई। वह हिरणी के पास गया और मीठी आवाज में बोला, “बहन हिरणी! तुम बहुत सुंदर हो। मैंने तुम्हारे जैसी सुंदर और चंचल हिरणी पूरे जंगल में नहीं देखी।”
हिरणी उसकी मीठी बातें सुनकर खुश हो गई। उसे लगा कि सियार उसका सच्चा मित्र बनना चाहता है।
सियार ने आगे कहा, “अगर तुम मेरे साथ जंगल के उस पार चलो, तो मैं तुम्हें एक ऐसी जगह दिखाऊँगा जहाँ हरी-भरी घास और मीठे फलों की भरमार है।”
हिरणी ने बिना सोचे-समझे उसकी बातों पर विश्वास कर लिया। वह सियार के साथ चल पड़ी।
कुछ दूर जाने के बाद सियार उसे एक सुनसान जगह पर ले गया। वहाँ न तो हरी घास थी और न ही मीठे फल। चारों ओर घनी झाड़ियाँ थीं। हिरणी को कुछ संदेह हुआ। उसने सियार से पूछा, “तुम मुझे यहाँ क्यों लाए हो? तुमने तो कहा था कि यहाँ बहुत सारी हरी घास और मीठे फल मिलेंगे।”
सियार जोर से हँसा और बोला, “मैंने तुम्हें मूर्ख बनाया है। अब तुम मेरे जाल में फँस चुकी हो।”
यह सुनकर हिरणी डर गई। वह वहाँ से भागने का रास्ता खोजने लगी। तभी उसे पास में एक शिकारी का जाल दिखाई दिया। सियार ने उसे उसी जाल की ओर ले जाने की योजना बनाई थी, ताकि शिकारी के आने पर वह हिरणी को पकड़ सके।
लेकिन हिरणी बहुत समझदार थी। उसने तुरंत अपनी गलती समझ ली और सावधानी से वहाँ से भागने लगी। भागते समय उसने सियार से कहा, “दूसरों को धोखा देने वाला एक दिन स्वयं भी मुसीबत में फँसता है।”
सियार हिरणी को भागते देखकर गुस्से से भर गया। वह उसके पीछे दौड़ा, लेकिन जल्दबाजी में उसे रास्ते में पड़ा शिकारी का जाल दिखाई नहीं दिया। उसका पैर जाल में फँस गया और वह बुरी तरह छटपटाने लगा।
अब सियार स्वयं उसी जाल में फँस चुका था, जिसका इस्तेमाल वह हिरणी को फँसाने के लिए करना चाहता था।
कुछ देर बाद शिकारी वहाँ पहुँचा। जाल में सियार को फँसा देखकर वह उसे पकड़कर अपने साथ ले गया।
दूसरी ओर, हिरणी सुरक्षित अपने जंगल में लौट आई। उस दिन उसने एक बड़ी सीख सीखी कि किसी अनजान व्यक्ति की मीठी बातों पर आँख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए।
कहानी से मिलने वाली नैतिक शिक्षा
जैसी करनी, वैसी भरनी।
जो व्यक्ति दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करता है और उन्हें धोखा देने की कोशिश करता है, उसे एक दिन अपने कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ सकता है। इसलिए हमें हमेशा दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, किसी को धोखा नहीं देना चाहिए और किसी पर भी बिना सोचे-समझे विश्वास नहीं करना चाहिए।
सीख: अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का परिणाम बुरा हो सकता है। इसलिए जीवन में हमेशा ईमानदारी, समझदारी और अच्छे आचरण का पालन करना चाहिए।
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