समुद्र के किनारे एक गरीब वृद्ध और उसकी पत्नी रहते थे। उनका जीवन बहुत ही साधारण था। वृद्ध रोज़ समुद्र में मछली पकड़ने जाता और उसी से उनका गुज़ारा चलता।
एक दिन वृद्ध के जाल में एक सुनहरी मछली फँस गई। जैसे ही उसने उसे पकड़ना चाहा, मछली बोली—
“हे वृद्ध! मुझे छोड़ दो, मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर दूँगी।”
वृद्ध दयालु था। उसने बिना कुछ माँगे ही मछली को छोड़ दिया और घर आकर सारी बात अपनी पत्नी को बताई।
यह सुनकर वृद्धा गुस्से से बोली—
“तुम कितने मूर्ख हो! कम से कम उससे एक अच्छा घर तो माँग लेते!”
पत्नी की बात मानकर वृद्ध फिर समुद्र तट पर गया। उसने मछली को पुकारा। मछली तुरंत आई और बोली—
“बताइए, आपको क्या चाहिए?”
वृद्ध ने कहा—
“मेरी पत्नी रहने के लिए एक अच्छा घर चाहती है।”
मछली बोली—
“घर जाओ, तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाएगी।”
वृद्ध जब घर पहुँचा, तो उसने देखा कि उनकी टूटी-फूटी झोपड़ी की जगह एक सुंदर पक्का मकान बन चुका था।
लेकिन वृद्धा का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ। उसने सोचा—
“अगर मेरे पास नौकर-चाकर होते, तो मैं भी धनी स्त्रियों की तरह रहती!”
वृद्ध को फिर समुद्र पर जाना पड़ा। मछली ने उसकी इच्छा फिर पूरी कर दी। अब उनके पास बड़ा महल, धन-दौलत और नौकर-चाकर सब कुछ था।
धीरे-धीरे वृद्धा बहुत घमंडी हो गई। वह नौकरों पर चिल्लाती और खुद को सबसे बड़ा समझने लगी।
एक दिन बाजार में उसने एक महारानी को देखा। सभी लोग उसे सम्मान दे रहे थे। यह देखकर उसके मन में और लालच जाग उठा।
वह घर आकर बोली—
“मुझे महारानी बनना है! जाओ, मछली से यह भी माँगो।”
वृद्ध दुखी मन से फिर समुद्र के पास गया। इस बार समुद्र उफन रहा था। मछली आई और वृद्ध ने अपनी पत्नी की इच्छा बताई।
मछली ने कहा—
“घर जाओ, तुम्हारी इच्छा पूरी होगी।”
अब वृद्धा सच में महारानी बन गई। लेकिन उसका लालच फिर भी नहीं रुका।
कुछ दिनों बाद उसने कहा—
“अब मैं समुद्र की रानी बनना चाहती हूँ, और वह सुनहरी मछली मेरी सेविका बने!”
वृद्ध यह सुनकर डर गया, फिर भी वह समुद्र तट पर गया। इस बार समुद्र बहुत ही भयानक रूप में था।
मछली आई और बोली—
“अब क्या चाहिए?”
वृद्ध ने काँपते हुए सब बता दिया।
मछली ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप समुद्र में चली गई।
वृद्ध जब घर लौटा, तो उसने देखा कि सब कुछ खत्म हो चुका था।
महल गायब था, नौकर-चाकर नहीं थे—
और उसकी पत्नी फिर से उसी पुरानी झोपड़ी में बैठी थी।
सीख (Moral):
👉 अत्यधिक लालच हमेशा विनाश का कारण बनता है।
👉 जो व्यक्ति संतोष नहीं करता, वह अंत में सब कुछ खो देता है।
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