हर रात शादी, हर सुबह मौत
(राजा और मंत्री की बेटी)
बहुत पुराने समय की बात है। एक विशाल राज्य में राजा विराज नाम का एक शक्तिशाली राजा राज करता था। वह वीर, बुद्धिमान और न्यायप्रिय माना जाता था, लेकिन उसके जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसने उसके दिल को पत्थर बना दिया।
कहा जाता है कि राजा की पहली रानी ने उसे धोखा दिया था। उसी दिन से राजा के मन में औरतों के प्रति गहरी नफरत भर गई। उसने एक भयानक नियम बना दिया—
हर रात वह एक नई लड़की से शादी करता और अगली सुबह उसे मौत के घाट उतार देता।
पूरा राज्य डर के साये में जीने लगा। किसी भी घर में बेटी होना जैसे अभिशाप बन गया। हर दिन किसी न किसी घर से चीखें उठतीं और महल के बाहर सन्नाटा छा जाता।
राजा का मंत्री शूरी यह सब देखकर अंदर ही अंदर टूट रहा था। वह जानता था कि यह अन्याय है, लेकिन राजा के सामने कुछ कहने की हिम्मत किसी में नहीं थी।
एक दिन मंत्री शूरी की अपनी बेटी ने उससे कहा—
“पिताजी, अगर इस अन्याय को रोकना है, तो किसी को आगे आना ही होगा। मैं राजा से विवाह करूंगी।”
मंत्री घबरा गया—
“नहीं बेटी! मैं तुम्हें मौत के मुंह में नहीं भेज सकता।”
लेकिन बेटी दृढ़ थी—
“पिताजी, हर औरत एक जैसी नहीं होती। अगर मैं राजा का दिल बदल सकूं, तो कई जिंदगियां बच सकती हैं।”
अंततः भारी मन से मंत्री ने उसकी बात मान ली।
महल की पहली रात
शादी हो गई। रात का समय था। राजा विराज अपनी नई रानी के पास आया। रानी के चेहरे पर डर की जगह एक अजीब-सी शांति थी।
राजा ने हैरानी से पूछा—
“तुम्हें डर नहीं लगता? कल सुबह तुम्हारी मौत तय है।”
रानी मुस्कुराई—
“महाराज, मौत तो हर किसी की तय है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई डरकर जीता है और कोई सच के साथ।”
राजा चुप हो गया।
फिर रानी बोली—
“महाराज, अगर अनुमति हो तो मैं आपको एक कहानी सुनाना चाहती हूँ।”
राजा ने इशारा किया—“सुनाओ।”
कहानी का जादू
रानी ने एक ऐसी कहानी शुरू की जिसमें प्रेम था, विश्वास था, और विश्वासघात भी… लेकिन कहानी अधूरी छोड़ दी।
राजा उत्सुक हो गया—
“आगे क्या हुआ?”
रानी ने शांत स्वर में कहा—
“वह मैं आपको कल बताऊंगी… अगर मैं जिंदा रही तो।”
राजा पहली बार असमंजस में पड़ गया। अगले दिन उसने रानी को मरवाने का आदेश नहीं दिया।
बदलाव की शुरुआत
हर रात रानी एक नई कहानी सुनाती, और हर बार उसे अधूरा छोड़ देती। राजा उन कहानियों में खोने लगा।
धीरे-धीरे उसके अंदर की नफरत पिघलने लगी। उसे एहसास हुआ कि एक व्यक्ति के धोखे की सजा पूरी स्त्री जाति को देना अन्याय है।
एक दिन राजा ने खुद कहा—
“तुम सही कहती हो… सभी औरतें एक जैसी नहीं होतीं। मैंने बहुत बड़ा अपराध किया है।”
उसने अपने नियम को खत्म कर दिया और पूरे राज्य से माफी मांगी।
अंत
राजा विराज एक बार फिर न्यायप्रिय बन गया। मंत्री की बेटी अब सिर्फ रानी नहीं, बल्कि पूरे राज्य की उद्धारकर्ता बन गई।
और उस दिन के बाद, राज्य में फिर कभी किसी बेटी की मौत का डर नहीं रहा।
सीख (Moral)
👉 एक व्यक्ति के दोष के कारण पूरी जाति को दोषी ठहराना गलत है।
👉 बुद्धि, धैर्य और साहस से सबसे कठोर दिल भी बदला जा सकता है।
हूँ।
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