बाँस का पेड़ और धैर्य की सीख


एक किसान ने अपने खेत में बाँस का बीज लगाया। वह रोज उसे पानी देता और उसकी देखभाल करता था।
एक साल बीत गया, लेकिन कोई पौधा नहीं निकला।
दो साल बीत गए, फिर भी कुछ नहीं हुआ।
तीन साल, चार साल… फिर भी जमीन के ऊपर कुछ दिखाई नहीं दिया।
गाँव वाले किसान का मज़ाक उड़ाने लगे कि उसका बीज बेकार है।
लेकिन किसान ने हार नहीं मानी। वह लगातार पानी देता रहा।
पाँचवें साल अचानक जमीन से एक छोटा सा पौधा निकला और कुछ ही हफ्तों में वह लगभग 80–90 फीट ऊँचा बाँस बन गया।
असल में वह बीज पहले चार साल तक जमीन के अंदर अपनी जड़ों को मजबूत कर रहा था।
सीख:
सफलता तुरंत नहीं मिलती। कई बार मेहनत लंबे समय तक दिखाई नहीं देती, लेकिन जब समय आता है तो सफलता तेजी से मिलती है।

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