एक समय की बात है। ब्रह्मदत्त नामक राजा काशी पर राज करते थे। उनकी रानी बहुत ही सुंदर और आभूषणों की शौकीन थी।
एक दिन सुबह-सुबह रानी तालाब में स्नान करने के लिए गई। जब वह पानी में उतरने लगी तो उसने अपनी कीमती मोतियों की माला उतारकर पास की एक चट्टान पर रख दी। रानी के सामान की रक्षा के लिए एक प्रहरी भी वहाँ खड़ा किया गया था।
लेकिन कुछ देर बाद प्रहरी को नींद आ गई और वह गहरी नींद में सो गया।
उसी समय पेड़ों पर रहने वाली बंदरों की एक टोली वहाँ आ गई। उनमें एक बंदरिया बहुत शरारती और मूर्ख थी। उसकी नजर चट्टान पर रखी चमकती हुई मोतियों की माला पर पड़ी। वह तुरंत नीचे उतरी और माला उठाकर पहन ली।
माला पहनकर वह बहुत खुश हुई और इधर-उधर उछलने-कूदने लगी। लेकिन उसे डर भी था कि कहीं कोई उसे देख न ले। इसलिए थोड़ी देर बाद उसने वह माला पास के एक पेड़ के खोखले तने में छुपा दी और वापस अपनी टोली में जा मिली।
जब रानी स्नान करके बाहर आई तो उसने देखा कि उसकी मोतियों की माला गायब है। यह देखकर रानी बहुत परेशान हो गई। प्रहरी की नींद खुली तो उसने तुरंत सैनिकों को बुला लिया। सैनिकों ने आसपास के लोगों को पकड़-पकड़ कर पूछताछ शुरू कर दी।
यह सब देख रहे एक बुद्धिमान मंत्री को शक हुआ कि यह काम किसी इंसान का नहीं बल्कि बंदरों का हो सकता है।
मंत्री ने एक चाल चली। उसने सैनिकों से कहा कि बाजार से सस्ती-सस्ती नकली मालाएँ खरीद कर लाओ और उन्हें बंदरों के सामने फेंक दो।
जैसे ही नकली मालाएँ बंदरों के सामने फेंकी गईं, सभी बंदर उन्हें पहनकर खेलने लगे। वही मूर्ख बंदरिया भी अपनी छुपाई हुई असली माला निकालकर पहन आई ताकि वह भी दूसरों की तरह सज सके।
बस फिर क्या था! सैनिकों ने तुरंत उसे देख लिया और पेड़ के खोखले से असली माला निकालकर रानी को लौटा दी।
रानी को अपनी माला वापस मिल गई और सबने उस बुद्धिमान मंत्री की बहुत प्रशंसा की।
सीख (Moral)
मूर्ख व्यक्ति अक्सर अपनी ही गलती से पकड़ा जाता है, और बुद्धिमानी से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।
0 Comments