मन की हर उलझन श्याम नाम से सुलझ जाए,
जो भी कान्हा को पुकारे, उसकी नैया पार लग जाए।
नन्दलाल की मुरली जब मधुर तान सुनाए,
पत्थर हृदय भी भक्ति रस में पिघल जाए।
कर्म पथ पर चलना सिखाया जग को श्याम ने,
फल की चिंता छोड़, जीवन सरल बनाया श्याम ने।
राधा के प्रेम में जो डूबा है श्याम स्वरूप,
वही बना भक्तों के जीवन का उज्ज्वल दीप।
श्याम नाम का अमृत जो हृदय में भर जाए,
संसार का हर विष भी प्रभु-कृपा बन जाए।
जहाँ श्रद्धा है, वहाँ श्रीकृष्ण विराजते हैं,
और जिनके संग कृष्ण हों, उनके दुःख स्वयं हार जाते हैं।
कान्हा की भक्ति में जो जीवन अर्पित हो जाए,
उसका हर श्वास भी गीता का उपदेश बन जाए।
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