पहाड़ों से घिरा एक छोटा-सा गांव था। धार्मिक कथाओं और सादगी के लिए वह गांव दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। उसी गांव में एक गरीब मोची भुवन रहता था। भुवन एक टूटी-फूटी सी झोपड़ी में रहता था। झोपड़ी की दीवारें जगह-जगह से दरकी हुई थीं, छत से बरसात में पानी टपकता था। अपनी सीमित कमाई से उसने जहां-तहां मरम्मत कर रखी थी, ताकि किसी तरह जीवन चल सके।
भुवन बहुत गरीब था, लेकिन ईमानदार और संतोषी था। रोज़ सुबह वह अपने औज़ार उठाकर गांव के चौराहे पर बैठ जाता और लोगों के जूते-चप्पल सिलकर जो थोड़ा-बहुत कमा लेता, उसी में अपना और अपनी पत्नी का गुज़ारा करता। वह कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करता था और न ही अपनी गरीबी का रोना रोता था। अक्सर वह कहा करता—
“जो समय आज कठिन है, वही कल सहारा भी बनेगा।”<script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233"
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गांव में एक सेठ भी रहता था, बहुत धनवान और घमंडी। वह भुवन की गरीबी का मज़ाक उड़ाया करता और कहता—
“इतनी मेहनत करके भी तेरा भाग्य नहीं बदला, क्या मिलेगा इस ईमानदारी से?”
भुवन मुस्कुरा कर बस इतना कहता—
“सेठ जी, समय सबसे बड़ा राजा है।”
कुछ वर्ष बीते। अचानक उस गांव में भयानक भूस्खलन हुआ। सेठ की बड़ी-बड़ी कोठियां ढह गईं, सारा धन नष्ट हो गया। वहीं पहाड़ी के निचले हिस्से में होने के कारण भुवन की छोटी-सी झोपड़ी सुरक्षित रह गई। मुश्किल समय में भुवन ने ही गांव वालों की मदद की, सबको आश्रय दिया और अपने थोड़े से साधनों को सबके साथ बाँटा।
सेठ, जो कभी घमंड से भरा रहता था, अब भुवन के सामने हाथ जोड़कर खड़ा था। उसकी आंखों में पश्चाताप था। उसने कहा—
“भुवन, आज समझ में आया कि धन नहीं, समय और कर्म ही बलवान होते हैं।”
भुवन ने सेठ को उठाकर गले लगा लिया और कहा—
“समय किसी का स्थायी नहीं होता। जो समय को समझ लेता है, वही सच्चा धनवान होता है।”
सीख:
👉 समय सबसे अधिक बलवान होता है। घमंड नहीं, धैर्य और अच्छे कर्म ही अंत में साथ देते हैं।
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