बहुत समय पहले मेघपुर नाम के गाँव में हरिराम नाम का एक साधारण किसान रहता था। वर्षा ही उसकी आजीविका थी। कई वर्षों से सूखा पड़ा था, लोग पूजा छोड़ने लगे थे।
हरिराम रोज़ खेत में जाकर हाथ जोड़कर आकाश की ओर देखता और कहता—
“हे इंद्र देव! यदि वर्षा न भी हो, मैं फिर भी कर्म नहीं छोड़ूँगा।”
🌿 परीक्षा
एक दिन गाँव में चर्चा हुई—
“पूजा से क्या होगा? मेहनत ही सब कुछ है।”
लेकिन हरिराम ने बीज बोना नहीं छोड़ा।
🌟 इंद्र की लीला
एक शाम काले बादल घिर आए। बिजली चमकी। इंद्र देव मेघों पर विराजमान होकर प्रकट हुए, वज्र हाथ में।
उन्होंने कहा—
“विश्वास वही है, जो कर्म के साथ चले।”
🌼 कृपा
मूसलाधार वर्षा हुई। खेत लहलहा उठे। गाँव में खुशहाली लौट आई।
🌸 शिक्षा
👉 कर्म के साथ विश्वास जुड़ जाए, तो चमत्कार होता है।
👉 ईश्वर प्रयास करने वालों का साथ देते हैं।
🙏✨
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