एक गाँव में एक मुर्गा रहता था। वह बहुत समझदार था। पास के जंगल में एक चालाक सियार रहता था, जो अक्सर मुर्गों को खाने की कोशिश करता था।
एक रात सियार चुपके से मुर्गे के पास आया और बोला,
“मुर्गे भाई, आज जंगल में उत्सव है। सब जानवर दोस्त बन गए हैं। आओ, नीचे उतर आओ।”
मुर्गे ने ऊपर से देखा और बोला,
“बहुत अच्छा! वैसे दो कुत्ते भी आ रहे हैं न, जो इस मित्रता की रखवाली करेंगे?”
यह सुनते ही सियार डर गया और बोला,
“नहीं-नहीं, मुझे याद आया, मुझे कहीं और जाना है,”
और वह भाग गया।
मुर्गा सुरक्षित रहा और हँसने लगा।
📘 शिक्षा:
समझदारी से छल से बचा जा सकता है।
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