“बहादुर राजकुमार और जादुई टट्टू”


बहुत समय पहले की बात है, एक प्रतापी राजा था। उसकी पहली पत्नी की मृत्यु के बाद उसने दूसरा विवाह कर लिया। पहली पत्नी से राजा का एक बेटा था, जो न केवल बहुत सुंदर था बल्कि अत्यंत बुद्धिमान भी था। लेकिन उसकी सौतेली माँ उसे बिल्कुल पसंद नहीं करती थी। वह हर समय इसी फिराक में रहती कि कैसे राजकुमार को महल से निकाल बाहर किया जाए।
अनोखी मित्रता
राजकुमार का सबसे प्रिय मित्र उसका सफेद टट्टू था। वह दूध जैसा सफेद था और उसके माथे पर चमकता हुआ एक सितारा बना था। राजकुमार हर शाम उसके पास जाता, उसे सहलाता और अपने दिल की सारी बातें उससे साझा करता। उसे नहीं पता था कि वह टट्टू कोई साधारण जानवर नहीं, बल्कि जादुई शक्तियों वाला था।
रानी की दुष्ट योजना
सौतेली माँ ने एक दिन सोचा, "जब तक यह राजकुमार और इसका टट्टू यहाँ हैं, मेरा प्रभाव कम रहेगा।" उसने बीमार होने का नाटक किया और बिस्तर पकड़ लिया। राजा ने बड़े-बड़े हकीमों को बुलाया। रानी ने हकीम को रिश्वत देकर एक भयानक बात कहलवाई।
हकीम ने राजा से कहा, "महाराज, रानी की जान तभी बच सकती है जब उन्हें उस सफेद टट्टू का कलेजा खिलाया जाए।"
राजा धर्मसंकट में पड़ गया। वह अपने बेटे के प्रिय टट्टू को मारना नहीं चाहता था, लेकिन पत्नी की जान बचाना भी उसका कर्तव्य था। अंत में, भारी मन से राजा ने अगले दिन टट्टू की बलि देने का आदेश दे दिया।
टट्टू की चेतावनी
उस शाम जब राजकुमार अस्तबल में गया, तो वह बहुत उदास था। अचानक, सफेद टट्टू मनुष्य की आवाज़ में बोल उठा, "मेरे मालिक, उदास मत हो। तुम्हारी सौतेली माँ ने मुझे मारने का षड्यंत्र रचा है। कल जब सिपाही मुझे ले जाने आएं, तो तुम राजा से कहना कि तुम आखिरी बार मेरी सवारी करना चाहते हो।"
उड़ान और विजय
अगले दिन सुबह, सारा दरबार इकट्ठा था। राजकुमार ने अपनी आखिरी इच्छा बताई। जैसे ही वह टट्टू की पीठ पर बैठा, टट्टू ने एक लंबी छलांग लगाई और ज़मीन छोड़कर हवा में उड़ने लगा। देखते ही देखते वह महल की दीवारों को लांघकर बादलों के पार चला गया।
टट्टू उसे एक दूसरे राज्य में ले गया जहाँ के लोग एक विशाल राक्षस से परेशान थे। राजकुमार ने अपनी बुद्धिमानी और टट्टू की जादुई शक्ति की मदद से उस राक्षस को हरा दिया। वहाँ के राजा ने खुश होकर अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार से कर दिया।
सत्य की जीत
कुछ सालों बाद, जब राजकुमार अपनी पत्नी और टट्टू के साथ वापस अपने पिता के राज्य लौटा, तो राजा को सौतेली माँ की पूरी सच्चाई पता चल चुकी थी। राजा ने अपनी गलती मानी और राजकुमार को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। वह सफेद टट्टू अब भी राजकुमार के पास था, जो वफ़ादारी और जादू का प्रतीक बनकर हमेशा उसके साथ रहा।
कहानी की सीख
"बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, सच्चाई और वफ़ादारी के सामने उसे हारना ही पड़ता है।"

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