🌺 भगवान सूर्य और कृतज्ञ किसान 🌺

बहुत समय पहले अरण्यपुर नाम के गाँव में केशव नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत परिश्रमी था, लेकिन फसल अक्सर खराब हो जाती थी। फिर भी वह कभी शिकायत नहीं करता।
हर सुबह वह खेत में हल चलाने से पहले भगवान सूर्य को जल अर्पित करता और कहता—
“हे सूर्यदेव! आज जो भी मिले, उसी में संतोष रहेगा।”
🌾 परीक्षा का समय
एक वर्ष भयंकर सूखा पड़ा। गाँव के लोग निराश हो गए। कुछ किसानों ने कहा—
“अब पूजा से क्या होगा?”
लेकिन केशव ने खेत की जुताई नहीं छोड़ी और रोज़ सूर्य को नमन करता रहा।
☀️ सूर्य की कृपा
एक दिन प्रातः आकाश लालिमा से भर गया। सूर्यदेव एक तेजस्वी पुरुष के रूप में प्रकट हुए, सात घोड़ों का रथ, हाथ में कमल।
उन्होंने कहा—
“कृतज्ञता वह बीज है, जिससे समृद्धि जन्म लेती है।”
अचानक बादल आए, वर्षा हुई। केशव की फसल लहलहा उठी।
🌼 फल
केशव समृद्ध हुआ, लेकिन उसने दान और सेवा का मार्ग अपनाया।
🌸 शिक्षा
👉 कृतज्ञ हृदय कभी खाली नहीं रहता।
👉 परिश्रम और विश्वास साथ हों तो ईश्वर कृपा करते हैं।

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