https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बहुत समय पहले की बात है, एक राजा अपने दरबार के काम से घोड़े पर सवार होकर जंगल के रास्ते से जा रहा था। सूरज की किरणें पेड़ों की शाखाओं के बीच खेल रही थीं और रास्ता शांत व सुनसान था।
इसी बीच राजा ने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति जमीन पर झुका हुआ, नन्हा सा आम का पौधा लगा रहा था। बूढ़े की झुर्रियों भरी आँखों में अनुभव की चमक थी, और उसके हाथ धीरे-धीरे मिट्टी में आम के पौधे को समेट रहे थे।
राजा ने सोचा, “यह वृद्ध आदमी इस छोटे से पौधे से क्या लाभ उठाएगा? यह पेड़ तो कई वर्षों बाद ही फल देगा, और शायद यह वृद्ध उस दिन तक जीवित भी न रहे।”
उसकी जिज्ञासा बढ़ गई। वह अपने घोड़े को रोककर बूढ़े के पास गया और पूछा,
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233“बाबा, यह आम का पौधा आप खिला रहे हैं, क्या इसका फल आप कभी खाएंगे?”
बूढ़े ने धीरे से मुस्कुराते हुए उत्तर दिया,
“नहीं महाराज, शायद मैं तब तक जीवित न रहूँ।”
राजा थोड़ी देर सोच में पड़ गया और फिर पूछा,
“तो फिर आप यह पेड़ क्यों लगा रहे हैं?”
बूढ़े ने अपने अनुभव भरे शब्दों में कहा,
“महाराज, मैं यह पेड़ अपने लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए लगा रहा हूँ। यह पेड़ मेरे पोते-पोतियों को सालों बाद स्वादिष्ट आम देगा। हम सभी अपने जीवन में ऐसे बीज बोते हैं जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी हों। जीवन में हर काम का फल तुरंत नहीं मिलता, लेकिन सही समय पर यह दूसरों के काम आता है। मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि मेरे पोते-पोती खुश रहें और प्रकृति का यह उपहार उन्हें मिले।”
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233राजा इस उत्तर को सुनकर बहुत प्रभावित हुआ। उसने अपने घोड़े की लगाम थाम ली और सोचा, “सचमुच, बुद्धिमान वही है जो अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए काम करता है।”
और उसी दिन से राजा ने न केवल अपने राज्य में, बल्कि अपने जीवन में भी दूसरों की भलाई के लिए कार्य करना शुरू किया।
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