बहुत समय पहले अवन्तिका नगरी में हरिदत्त नाम का एक अत्यंत धनी सेठ रहता था। उसके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसका हृदय कंजूसी और अहंकार से भरा हुआ था। वह कहा करता—
“धन मेरी मेहनत का फल है, इसे बाँटने की कोई आवश्यकता नहीं।”
उसी नगरी में माधवी नाम की एक गरीब विधवा रहती थी। वह प्रतिदिन मंदिर में झाड़ू लगाती और जो थोड़ा-बहुत मिलता, उसी में संतोष कर लेती।
🌿 देवी की परीक्षा
एक दिन देवी लक्ष्मी एक साधारण वृद्धा का वेश धारण कर सेठ हरिदत्त के द्वार पर पहुँचीं और बोलीं—
“बेटा, दो दिन से भूखी हूँ, थोड़ा अन्न मिल जाए तो प्राण बच जाएँ।”
सेठ ने क्रोध से द्वार बंद कर दिया। उसी समय देवी लक्ष्मी माधवी की झोपड़ी पर पहुँचीं। माधवी के पास केवल एक रोटी थी। उसने बिना सोचे-समझे वह रोटी वृद्धा को दे दी और स्वयं जल पीकर सो गई।
🌟 चमत्कार
अगली सुबह माधवी की झोपड़ी दिव्य प्रकाश से भर गई। देवी लक्ष्मी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं। उन्होंने कहा—
“जिसके पास कम होकर भी देने का साहस हो, वही सच्चा धनवान है।”
उधर सेठ हरिदत्त का सारा धन धीरे-धीरे नष्ट होने लगा। उसे अपनी भूल का ज्ञान हुआ। वह माधवी के चरणों में गिर पड़ा और क्षमा माँगी।
🌼 परिवर्तन
देवी लक्ष्मी ने सेठ को क्षमा तो कर दिया, लेकिन कहा—
“धन वहीं टिकता है, जहाँ करुणा और दान का वास हो।”
सेठ का हृदय बदल गया। उसने जीवन भर दान और सेवा का मार्ग अपनाया।
🌸 शिक्षा
👉 दान धन से नहीं, भावना से महान होता है।
👉 करुणा के बिना समृद्धि टिकती नहीं।
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