एक राज्य में एक बुद्धिमान लेकिन जिज्ञासु राजा राज्य करता था। एक दिन उसके मन में एक अजीब-सा प्रश्न उठा—
राज्य के लोगों के घर-गृहस्थी में आखिर चलता किसका है, पति का या पत्नी का?
राजा ने इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला। उसने पूरे राज्य में ऐलान करवाया—
“जिसके घर में पति का हुक्म चलता हो, वह अपनी पसंद का एक घोड़ा इनाम में ले जाए।
और जिसके घर में पत्नी की सरकार चलती हो, वह एक सेब ले जाए।”
अगले दिन दरबार सजा। लोग लाइन लगाकर आने लगे।
राजा हैरान रह गया—एक के बाद एक सब लोग सेब उठाकर जाने लगे।
राजा मन ही मन सोचने लगा,
“क्या मेरे पूरे राज्य में एक भी ऐसा घर नहीं जहाँ पति का हुक्म चलता हो?”
तभी दरबार में एक लंबी मूँछों वाला, हट्टा-कट्टा जवान पूरे आत्मविश्वास से आगे आया।
उसने छाती चौड़ी करते हुए कहा—
“महाराज! मेरे घर में तो मेरा ही हुक्म चलता है। आप मुझे घोड़ा दीजिए।”
राजा प्रसन्न हो गया।
“बहुत अच्छा! जाओ, अपनी पसंद का घोड़ा चुन लो।”
जवान ने एक शानदार काला घोड़ा चुना और खुशी-खुशी घर चला गया।
लेकिन थोड़ी ही देर बाद वह फिर दरबार में लौट आया।
राजा ने आश्चर्य से पूछा—
“क्या हुआ जवान? वापस क्यों आ गए?”
जवान ने संकोच से कहा—
“महाराज, घरवाली कहती है कि काला रंग अशुभ होता है। सफेद रंग शांति का प्रतीक होता है।
इसलिए आप काले घोड़े की जगह सफेद घोड़ा दे दीजिए।”
यह सुनकर राजा मुस्कुरा उठा और बोला—
“बेटा, घोड़ा यहीं छोड़ दो और एक सेब लेकर जाओ।”
दरबार में ठहाके गूंज उठे।
शाम तक दरबार खाली हो गया। सब लोग सेब लेकर अपने-अपने घर चले गए।
आधी रात का रहस्य
रात के सन्नाटे में अचानक दरवाज़ा खटखटाया।
राजा ने पूछा—
“कौन है?”
महामंत्री की आवाज़ आई—
“महाराज, मैं हूँ।”
राजा ने उन्हें अंदर बुलाया।
महामंत्री बोला—
“महाराज, आपने इनाम में सेब और घोड़ा रखा।
अगर उसकी जगह अनाज या सोने की मोहर रखते तो लोग कुछ दिन खा सकते थे या गहने बनवा सकते थे।”
राजा मुस्कुराया और बोला—
“मुझे तो यही रखना था,
लेकिन महारानी ने कहा कि सेब और घोड़ा ही ठीक है, इसलिए वही रखा।”
यह सुनते ही महामंत्री तुरंत बोले—
“तो महाराज, आपके लिए भी एक सेब काट दूँ?”
राजा ठहाका मारकर हँस पड़ा।
फिर राजा ने पूछा—
“यह बात तुम सुबह दरबार में भी कह सकते थे, आधी रात को क्यों आए?”
महामंत्री ने सिर झुकाकर कहा—
“महाराज, मेरी धर्मपत्नी ने कहा था—
‘अभी जाओ और पूछकर आओ, तभी सच्चाई का पता चलेगा।’”
यह सुनकर राजा सब समझ गया और बोला—
“महामंत्री, अब मुझे अपने सवाल का जवाब मिल गया।”
सीख / संदेश
घर की शांति हुक्म चलाने से नहीं,
आपसी समझ और तालमेल से बनी रहती है।
और सच्चाई यह है कि—
कई बार जो हुक्म चलता दिखता है, वह प्यार की सहमति होती है। 😄🍎
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