एक घने जंगल में एक विशाल हाथी रहता था। वह बहुत शक्तिशाली था, लेकिन उतना ही दयालु भी। उसी जंगल में एक छोटा सा खरगोश रहता था।
एक साल भयंकर गर्मी पड़ी। तालाब सूखने लगे। जंगल के जानवर पानी के लिए परेशान हो गए। एक दिन प्यास से व्याकुल खरगोश इधर-उधर भटकता हुआ हाथी के पास पहुँचा।
खरगोश ने काँपती आवाज़ में कहा,
“हाथी दादा, मुझे बहुत प्यास लगी है। क्या आपको कहीं पानी का पता है?”
हाथी ने सोचा और अपनी सूँड से ज़मीन को थोड़ा खोदा। कुछ ही देर में वहाँ से साफ़ पानी निकल आया। खरगोश खुशी से उछल पड़ा और पानी पीकर तृप्त हो गया।
कुछ दिनों बाद शिकारी जंगल में आए और हाथी के लिए जाल बिछा दिया। हाथी अनजाने में उस जाल में फँस गया। वह बहुत कोशिश करने लगा, लेकिन निकल नहीं पाया।
उसी समय खरगोश वहाँ से गुज़रा। उसने जल्दी से गाँव जाकर लोगों को बुलाया। सभी मिलकर आए और हाथी को जाल से मुक्त कर दिया।
हाथी ने कहा,
“आज मुझे समझ आया कि दया कभी व्यर्थ नहीं जाती।”
खरगोश मुस्कराया और बोला,
“छोटा हो या बड़ा, मदद करने वाला ही महान होता है।”
📘 शिक्षा:
दयालुता और मदद का फल हमेशा मिलता है।
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