देवी दुर्गा और महिषासुर युद्धा

 

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक बहुत ही बलवान और अहंकारी असुर पैदा हुआ — महिषासुर। उसने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान माँगा:
"कोई देवता या असुर मुझे न मार सके, मेरी मृत्यु केवल किसी स्त्री के हाथों हो।"

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233ब्रह्मा जी ने वरदान दे दिया। महिषासुर को लगा कि स्त्रियाँ तो कोमल और कमजोर होती हैं, वे उसे कभी नहीं मार पाएँगी। इस घमंड में उसने तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया। देवता भी उससे हार गए और स्वर्ग से भागना पड़ा।

🔥 देवताओं ने की देवी दुर्गा की रचना 🔥

जब कोई उपाय नहीं बचा, तो ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपनी शक्तियों को मिलाकर एक दिव्य स्त्री रूप का निर्माण किया — https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233देवी दुर्गा

उनकी दस भुजाएँ थीं, हर भुजा में देवताओं ने अपने-अपने दिव्य अस्त्र दिए:

  • विष्णु का सुदर्शन चक्र
  • शिव का त्रिशूल
  • इंद्र का वज्र
  • अग्नि का शक्ति भाला
  • वरुण का पाश
    ...और अन्य अनेक अस्त्र।

⚔️ https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233महिषासुर से युद्ध ⚔️

देवी दुर्गा ने सिंह पर सवार होकर युद्ध क्षेत्र में प्रवेश किया। महिषासुर कभी भैंसे का रूप लेता, कभी मनुष्य का, कभी हाथी का — लेकिन देवी दुर्गा ने हर रूप में उसका डटकर मुकाबला किया।

आखिरकार, नौ दिनों तक युद्ध करने के बाद देवी ने दसवें दिन महिषासुर का वध किया।

 

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