एक जंगल में एक गधा चर रहा था। अचानक उसके पैर में एक कांटा चुभ गया। गधे को बहुत दर्द हुआ, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और कोई उपाय सोचने लगा।
उसी समय वहाँ एक भेड़िया आ पहुँचा। वह गधे को देखकर खुश हो गया और सोचने लगा, "आज तो मेरा अच्छा शिकार मिल गया!"
गधे ने भेड़िये की नीयत भाँप ली और तुरंत एक चालाकी भरा विचार उसके दिमाग में आया। वह दर्द से कराहता हुआ बोला, "भेड़िया भाई, मुझे मारने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा पूरी कर दो।"
भेड़िया चौंक गया और बोला, "बताओ, तुम्हारी क्या इच्छा है?"
गधा बोला, "मेरे पैर में एक बड़ा कांटा चुभा है। अगर तुम मुझे इस हालत में खा लोगे, तो तुम्हारे गले में कांटा फँस जाएगा और तुम्हें बहुत तकलीफ होगी। इसलिए पहले कृपा करके यह कांटा निकाल दो, फिर आराम से मुझे खा लेना।"
भेड़िया गधे की बातों में आ गया। उसने सोचा, "बात तो सही कह रहा है। पहले कांटा निकाल देता हूँ, फिर मजे से इसे खा लूँगा।"
जैसे ही भेड़िया गधे के पैर से कांटा निकालने के लिए झुका, गधे ने पूरी ताकत से उसे जोरदार दुलत्ती मार दी। भेड़िया दर्द से कराह उठा और जमीन पर गिर पड़ा। इस बीच गधा तेजी से भाग निकला और अपनी जान बचा ली।
भेड़िया गधे की चालाकी समझ गया और पछताते हुए बोला, "यह तो वैद्य का काम था, मेरा नहीं। बिना सोचे-समझे मैंने यह काम किया और अपने शिकार से भी हाथ धो बैठा। अब से कभी ऐसा काम नहीं करूँगा, जो मुझे न आता हो!"
शिक्षा:
विपत्ति के समय सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
0 Comments