"बुद्धिमान राजा की चालाकी"


https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233पुराने समय की बात है।   एक छोटा सा राज्य था। यह राज्य अपनी शांति और खुशहाली के लिए जाना जाता था। वहां के राजा न्यायप्रिय और चतुर थे। उनकी सेना बड़ी नहीं थी, लेकिन उनके सैनिक बहादुर और निडर थे।

एक दिन राज्य के गुप्तचरों ने राजा को खबर दी कि पड़ोसी राज्य उसके राज पर हमला करने की योजना बना रहा है। यह सुनकर राजा चिंतित तो हुए, लेकिन घबराए नहीं। उन्होंने तुरंत अपने मंत्रियों और सेनापतियों को बुलाकर मंत्रणा की।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233राजा की योजना
राजा ने सोचा, "हमारी सेना पड़ोसी राज्य की विशाल सेना से मुकाबला नहीं कर सकती। हमें बल से नहीं, बुद्धि से इस युद्ध को टालना होगा।"

राजा ने अपने गुप्तचरों को दुश्मन राज्य में भेजा, ताकि वे उनके सैनिकों और रणनीति की पूरी जानकारी ला सकें। जल्द ही गुप्तचरों ने बताया कि शत्रु सेना थकी हुई है और उनके सैनिक अपने राजा से नाराज भी हैं।

इस जानकारी का उपयोग कर राजा ने एक चतुर योजना बनाई। उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि वे पड़ोसी राज्य की सीमाओं के पास बड़े-बड़े मशाल जलाएं और जोर-जोर से युद्ध के नगाड़े बजाएं। ऐसा लगने लगा जैसे उसके राज की सेना बहुत विशाल और तैयार है।

इसके अलावा, राजा ने कुछ गुप्तचरों को पड़ोसी राज्य में भेजा और अफवाह फैला दी कि महोसर की सेना को शक्तिशाली योद्धाओं का समर्थन मिल गया है और यदि हमला किया गया, तो भयानक परिणाम होंगे।

शत्रु का डर और युद्ध का टलना
यह सुनकर पड़ोसी राज्य के राजा को डर लगने लगा। उन्होंने सोचा कि उस राज की सेना से भिड़ना ठीक नहीं होगा। उनके सैनिक पहले ही असंतुष्ट थे, और अगर वे थके हुए सैनिकों को युद्ध में झोंकते, तो हार निश्चित थी।

इस डर से पड़ोसी राजा ने उस छोटे राज पर हमला करने का विचार छोड़ दिया और अपनी सेना को वापस बुला लिया। इस तरह, उस छोटे राज के चतुर राजा ने बिना युद्ध किए ही अपने राज्य को बचा लिया।

शिक्षा:

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233

बुद्धिमानी और सही रणनीति से बड़ी से बड़ी विपत्ति को टाला जा सकता है।

Post a Comment

0 Comments