बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में मोहन और सोहन नाम के दो मित्र रहते थे। दोनों गरीब थे लेकिन मेहनती थे। एक दिन उन्हें जंगल में घूमते हुए एक साधु मिले। साधु ने उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर उन्हें एक जादुई कटोरा दिया और कहा, "यह कटोरा जो भी खाना इसमें डालोगे, उसे दोगुना कर देगा। लेकिन याद रखना, लालच मत करना।"
दोनों मित्र बहुत खुश हुए और घर आकर कटोरे को आजमाया। उन्होंने उसमें चावल डाला, और देखते ही देखते चावल दोगुने हो गए! धीरे-धीरे उनकी गरीबी दूर होने लगी और वे आराम से रहने लगे।
कुछ समय बाद, सोहन के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, "अगर यह कटोरा खाना दोगुना कर सकता है, तो क्यों न इसे सोने और चाँदी से भरकर अमीर बन जाऊँ?"
उसने कटोरे में सोने की एक मुद्रा डाली, लेकिन कटोरे ने काम करना बंद कर दिया। वह घबरा गया और मोहन को बताया। जब वे कटोरे को लेकर साधु के पास गए, तो साधु ने कहा, "मैंने पहले ही कहा था कि लालच मत करना। इस कटोरे का जादू अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है।"
सोहन अपनी गलती पर पछताने लगा, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।
शिक्षा:
लालच हमेशा नुकसान पहुँचाता है। संतोष में ही सच्चा सुख है, और जो ज्यादा पाने की चाह में मर्यादा तोड़ता है, वह अंत में सब कुछ खो देता है।
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