https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233प्राचीन काल की बात है, चित्रभानु नामक एक राजा थे। वे बहुत धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे। लेकिन एक दिन, उन्हें अचानक अपने पूर्व जन्म की स्मृतियाँ प्राप्त हो गईं। इस स्मृति ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
राजा ने अपने मंत्रियों और पुरोहितों को बुलाया और कहा, "मुझे अपने पूर्व जन्म की याद आ गई है। मैं एक शिकारी था, जो जंगल में पशुओं का शिकार कर अपने परिवार का पालन करता था। लेकिन एक दिन जो घटना घटी, उसने मेरी आत्मा को बदल दिया।"
पूर्व जन्म की घटना
राजा ने आगे बताया, "एक बार, मैं जंगल में शिकार के लिए निकला था, लेकिन पूरे दिन मुझे कोई शिकार नहीं मिला। शाम हो गई और भूख-प्यास से व्याकुल मैं एक बेल वृक्ष के नीचे ठहर गया। वहाँ एक शिवलिंग था, लेकिन मुझे इसकी जानकारी नहीं थी।"
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233"रात में, मैंने पास की झील से जल लाकर अपनी प्यास बुझाई। कुछ पानी बच गया, जिसे मैंने बेल के पत्तों के साथ नीचे गिरा दिया। अज्ञानतावश, वह जल और बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए। यह महाशिवरात्रि की रात थी, और अनजाने में मैंने शिवजी की पूजा कर दी।"
"सुबह होते ही, मैं शिकार की तलाश में निकल पड़ा, लेकिन दुर्भाग्यवश एक बाघ ने मुझ पर हमला कर दिया और मेरी मृत्यु हो गई। जब मेरी आत्मा यमलोक पहुंची, तो यमराज ने बताया कि अनजाने में किए गए शिव पूजन के कारण मुझे अगले जन्म में राजा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है!"
कथा से सीख:
यह कथा हमें यह सिखाती है कि भगवान शिव की भक्ति अज्ञानतावश भी की जाए तो भी वह फलदायी होती है।https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233 शिवजी भक्तों के भाव को देखते हैं, न कि उनके कर्मों की विधि को। इसलिए सच्चे हृदय से की गई पूजा हमेशा शुभ फल देती है।
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