एक समय की बात है, एक गांव में एक बैल रहता था जिसे घूमने-फिरने का बहुत शौक था। एक दिन वह अपनी आदत के अनुसार इधर-उधर घूमते हुए गांव से दूर जंगल की ओर चला गया। वह जंगल की सुंदरता में इतना खो गया कि उसे पता ही नहीं चला कि वह गांव का रास्ता भूल गया है।
जंगल में चलते-चलते, वह एक तालाब के पास पहुंचा। तालाब का पानी बहुत साफ और ठंडा था। बैल ने पानी पिया और तालाब के पास की हरी-हरी घास का स्वाद लिया। जंगल की शांति उसे बहुत भा रही थी।
उसी तालाब के पास एक सियार रहता था। वह बहुत चालाक और चतुर था। उसने जैसे ही बैल को देखा, उसकी आंखों में चमक आ गई। उसने सोचा, "यह बैल तो मेरे लिए अच्छा मौका है। अगर मैं इसे अपने जाल में फंसा लूं, तो मुझे कई दिनों तक खाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।"
सियार ने बैल के पास जाकर बड़ी ही मीठी आवाज में कहा, "अरे भाई बैल, क्या तुम यहां नए हो? यह जंगल बहुत खतरनाक है। मैं यहां का राजा हूं और सबकी रक्षा करता हूं। तुम मेरे साथ रहोगे तो सुरक्षित रहोगे।"
बैल सियार की बातों
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में आ गया। उसने सोचा कि सियार उसकी मदद कर सकता है। कुछ दिन तक सियार ने बैल को अपने साथ रखा और उसे जंगल में इधर-उधर घुमाया। लेकिन सियार अंदर ही अंदर बैल को धोखा देने की योजना बना रहा था।
एक दिन सियार ने बैल से कहा, "तुम बहुत मजबूत हो। अगर तुम मेरे लिए कुछ शिकार कर दो, तो मैं तुम्हें जंगल में रहने की पूरी आज़ादी दे दूंगा।" बैल भोला था और उसने सियार की बात मान ली। वह शिकार की तलाश में निकल पड़ा।
लेकिन जंगल के जानवरों ने बैल को देख लिया और समझ गए कि सियार उसे धोखा दे रहा है। उन्होंने बैल को सियार की चालाकी के बारे में बताया। बैल को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सोचा, "मुझे अब सियार से बदला लेना होगा।"
बैल तालाब के पास लौटकर सियार के पास गया और कहा, "सियार भाई, मैंने शिकार कर लिया है। लेकिन वह बहुत भारी है। तुम मेरी मदद करो।" सियार खुशी-खुशी उसके साथ चल पड़ा।
बैल उसे एक गड्ढे के पास ले गया और जैसे ही सियार ने झांककर गड्ढे में देखा, बैल ने उसे जोर से धक्का दे दिया। सियार गड्ढे में गिर गया और बाहर नहीं निकल सका।
बैल ने राहत की सांस ली और जंगल के जानवरों का धन्यवाद किया। उसने ठान लिया कि अब वह कभी किसी अनजान पर भरोसा नहीं करेगा। इसके बाद बैल गांव का रास्ता ढूंढते हुए सुरक्षित अपने घर लौट गया।
शिक्षा: हमें कभी भी किसी पर बिना सोचे-समझे भरोसा नहीं करना चाहिए, खासकर उन पर जो जरूरत से ज्यादा मीठा बोलते हैं।
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