kahani hindi storyमूर्ख नौकर

बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य में एक राजा रहता था। उसके पास एक नौकर था जो राजा की हर आज्ञा का पालन करता और उसकी सेवा में लगा रहता। वह ईमानदार और मेहनती था, लेकिन थोड़ा मूर्ख भी।

एक दिन राजा ने अपनी तलवार साफ करने के लिए नौकर को दी और कहा, "इस तलवार को अच्छी तरह साफ करो और ध्यान रखना कि इसे नुकसान न पहुंचे। यह मेरे लिए बहुत कीमती है।"

नौकर तलवार लेकर महल के बगीचे में गया और उसे साफ करने लगा। वह सोचने लगा, "राजा ने कहा है कि तलवार को नुकसान न पहुंचे, लेकिन क्या यह सही में तेज है? मुझे इसे आजमाना चाहिए।"

उसने तलवार की धार जांचने के लिए एक पेड़ की टहनी काट दी। धार बहुत तेज थी, और टहनी कट गई। नौकर ने सोचा, "यह तो सच में तेज है। लेकिन इससे कुछ बड़ा काटकर देखूं तो ज्यादा मज़ा आएगा।"

फिर उसने पास के एक रस्सी से बंधे मटके को काट दिया। तलवार की धार से मटका टूट गया, और पानी बहने लगा।

अब नौकर ने सोचा, "मैंने तो राजा की तलवार को खूब आजमा लिया, लेकिन शायद राजा मुझसे नाराज होंगे। मुझे यह बात उन्हें बतानी नहीं चाहिए।"

वह तलवार को धो-पोंछकर राजा के पास ले गया।

राजा ने तलवार देखकर पूछा, "क्या तुमने इसे आजमाया?"

नौकर ने डरते हुए जवाब दिया, "हाँ महाराज, मैंने इसकी धार देखी। यह बहुत तेज है। इससे मैंने एक पेड़ की टहनी और मटका काटा।"

राजा गुस्से से लाल हो गए और बोले, "मूर्ख! मैंने तुम्हें तलवार साफ करने के लिए दी थी, न कि इसे आजमाने के लिए। तुम्हारी मूर्खता से मेरी तलवार की धार कमजोर हो सकती थी।"

नौकर ने सिर झुकाकर माफी मांगी और कहा, "महाराज, मुझसे गलती हो गई। आगे से मैं आपकी हर बात समझदारी से मानूंगा।"

राजा ने उसकी ईमानदारी और पश्चाताप देखकर उसे माफ कर दिया, लेकिन उसे समझाया कि किसी भी कार्य को सोच-समझकर करना चाहिए।

कहानी का संदेश:

ईमानदारी अच्छी बात है, लेकिन किसी भी काम में समझदारी और सावधानी भी जरूरी है। मूर्खता से अच्छे काम भी गलत हो सकते हैं।
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