एक समय की बात है, एक राज्य में एक राजा रहता था। उसके पास चार रानियां थीं, और वे सभी अलग-अलग गुणों से भरी हुई थीं। लेकिन राजा का व्यवहार अपनी रानियों के प्रति अलग-अलग था।
पहली रानी
पहली रानी सबसे सुंदर थी। उसकी खूबसूरती का कोई मुकाबला नहीं था। राजा को उसकी सुंदरता से इतना मोह था कि वह घंटों उसे देखता रहता, लेकिन उससे बात करने या उसके मन की बातें जानने का समय नहीं निकालता।
दूसरी रानी
दूसरी रानी भी कम सुंदर नहीं थी। वह बहुत आकर्षक थी और हमेशा राजा के पास बैठा करती। राजा को उसकी संगत इतनी भाती कि वह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता था। लेकिन राजा का यह प्यार केवल उसकी सुंदरता तक सीमित था।
तीसरी रानी
तीसरी रानी तो इतनी सुंदर और समझदार थी कि राजा उसे हर जगह अपने साथ ले जाता। राजदरबार हो या कोई युद्ध, तीसरी रानी हमेशा राजा के साथ होती। राजा उसकी सलाह भी लेता, लेकिन उसके मन के गहरे कोने तक कभी नहीं पहुंचा।
चौथी रानी
अब बात आती है चौथी रानी की। वह सबसे साधारण दिखने वाली थी। उसका रूप-रंग बाकी रानियों जितना आकर्षक नहीं था, लेकिन उसका दिल सोने जैसा था। उसने हमेशा राजा का साथ दिया, सुख में भी और दुख में भी। लेकिन राजा ने कभी उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। वह उसे नजरअंदाज करता और उसकी सच्चाई को कभी नहीं समझा।
राजा की बीमारी
समय बीता और राजा बूढ़ा हो गया। एक दिन वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। उसने महसूस किया कि उसका अंत निकट है। वह अकेला महसूस करने लगा और सोचने लगा कि आखिर इस अंतिम समय में कौन उसका साथ देगा।
रानियों का उत्तर
राजा ने अपनी पहली रानी से पूछा, "क्या तुम मेरे साथ जाओगी?"
पहली रानी ने कहा, "नहीं, मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती। मैं केवल तुम्हारे दरबार में ही रह सकती हूँ।"
फिर उसने दूसरी रानी से पूछा, "क्या तुम मेरे साथ चलोगी?"
दूसरी रानी बोली, "मुझे माफ करना, लेकिन मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती। मैं तुम्हारी मौत के बाद किसी और के साथ रहूंगी।"
राजा ने तीसरी रानी से भी वही सवाल किया। उसने कहा, "मैं तुम्हारे साथ केवल यहां तक चल सकती हूँ। तुम्हारी मौत के बाद मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करूंगी, लेकिन आगे नहीं जाऊंगी।"
अंत में राजा ने भारी मन से चौथी रानी से पूछा, "क्या तुम मेरे साथ चलोगी?"
चौथी रानी ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं तुम्हारे साथ हर जगह जाऊंगी। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूंगी, चाहे कुछ भी हो।"
राजा की समझ
राजा की आंखें भर आईं। उसने महसूस किया कि वह चौथी रानी को हमेशा नजरअंदाज करता रहा, जबकि वही सच्ची और वफादार थी।
कहानी का संदेश
इस कहानी में चार रानियां हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं का प्रतीक हैं:
- पहली रानी हमारे शरीर का प्रतीक है। हम इसे सुंदर बनाने में वक्त बिताते हैं, लेकिन अंत में यह हमें छोड़ देता है।
- दूसरी रानी हमारी संपत्ति है। मौत के बाद यह किसी और के पास चली जाती है।
- तीसरी रानी हमारे रिश्ते और प्रतिष्ठा है। ये केवल मृत्यु तक हमारे साथ रहते हैं।
- चौथी रानी हमारी आत्मा है। जिसे हम अक्सर नजरअंदाज करते हैं, लेकिन अंत में वही हमारे साथ रहती है।
इसलिए हमें अपनी आत्मा का ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि यही हमारी सच्ची साथी है।
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