एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक लड़की रहती थी। राधा बचपन से ही खुले आसमान और पतंग उड़ाने की दीवानी थी। लेकिन गाँव में लड़कियों को पतंग उड़ाने की इजाज़त नहीं थी। लोग मानते थे कि यह काम केवल लड़के कर सकते हैं।
राधा को यह बात हमेशा चुभती थी। वह सोचती, "क्या आसमान सिर्फ़ लड़कों का है? क्या हवा लड़कियों के लिए नहीं बहती?" उसकी माँ उसे समझातीं, "बेटा, दुनिया की बातें मत सुनो, अपने सपनों के पीछे भागो।"
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एक दिन मकर संक्रांति का त्योहार आया। पूरा गाँव पतंग उड़ाने में मस्त था। राधा अपनी खिड़की से आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देख रही थी। अचानक उसकी नज़र एक सुनहरी पतंग पर पड़ी। वह पतंग सबसे ऊँची उड़ रही थी। राधा के दिल में उस पतंग को उड़ाने की तीव्र इच्छा जागी।
उसने अपनी गुल्लक तोड़ी और गाँव के मेले से एक पतंग और मांझा खरीदा। रात को जब सब सो गए, राधा चुपके से घर की छत पर चली गई। ठंडी हवा में उसने अपनी पतंग उड़ानी शुरू की। पहली बार पतंग फंस गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। कई कोशिशों के बाद उसकी पतंग आसमान में उड़ने लगी।
सुबह जब लोग जागे, तो उन्होंने आसमान में एक नई पतंग देखी, जिस पर लिखा था:
"हवा सबकी है।"
गाँव के लड़कों ने यह देख कर उसका मज़ाक उड़ाया, लेकिन राधा ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। उसने हर दिन पतंग उड़ाने की प्रैक्टिस की। धीरे-धीरे उसकी पतंगें सबसे ऊँची और सबसे खूबसूरत बनने लगीं।अगले साल गाँव में एक
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बड़ा पतंग प्रतियोगिता हुआ। राधा ने भी उसमें हिस्सा लिया। लोग हैरान थे कि एक लड़की पतंगबाज़ी में हिस्सा लेने आई है। लेकिन राधा ने अपनी सुनहरी पतंग को इतनी कुशलता से उड़ाया कि सब देखते रह गए। उसकी पतंग ने पूरे गाँव की पतंगों को काट दिया और वह विजेता बनी।
गाँव के लोगों को समझ आ गया कि आसमान और सपने लड़के-लड़कियों के बीच फर्क नहीं करते। उस दिन के बाद गाँव में लड़कियों को भी पतंग उड़ाने की आज़ादी मिल गई।
मोरल: सपनों की कोई सीमा नहीं होती। अगर आपमें हौसला है, तो आप हर मुश्किल को पार कर सकते हैं।
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