kahani hindi storyमेहनती चींटी और आलसी टिड्डा

एक बार की बात है, एक हरे-भरे खेत में एक मेहनती चींटी और एक आलसी टिड्डा रहते थे। चींटी दिनभर काम करती थी। वह अनाज के दाने इकट्ठा करती और उन्हें अपने बिल में सुरक्षित रखती। वहीं, टिड्डा धूप में आराम से लेटा रहता और गाना गाता।

एक दिन, टिड्डे ने चींटी को भाग-दौड़ करते देखा और हँसते हुए बोला, "अरे चींटी, तुम क्यों इतनी मेहनत करती हो? आओ, मेरे साथ गाओ और मौज करो।"

चींटी ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "मैं सर्दियों की तैयारी कर रही हूँ। जब ठंड का मौसम आएगा, तो हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा। इसीलिए मैं आज मेहनत कर रही हूँ।"

टिड्डा हँसते हुए बोला, "अरे, सर्दियों की चिंता क्यों कर रही हो? अभी तो बहुत समय है। आराम करो और जिंदगी का मज़ा लो।"

चींटी ने कोई जवाब नहीं दिया और अपने काम में लगी रही।

कुछ महीनों बाद सर्दियां आ गईं। खेत बर्फ से ढक गया, और खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा। टिड्डा ठंड से कांपता हुआ भूखा इधर-उधर भटकने लगा। जब उसे कोई सहारा नहीं मिला, तो वह चींटी के पास पहुँचा।

टिड्डे ने चींटी से कहा, "मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी और पूरा समय आराम करता रहा। अब मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है। क्या तुम मेरी मदद करोगी?"

चींटी ने दयालुता से कहा, "मैं तुम्हें खाना दूंगी, लेकिन अगली बार से मेहनत करना सीखो। जिंदगी में मस्ती के साथ-साथ जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।"

टिड्डा ने वादा किया कि वह अगली बार मेहनत करेगा और चींटी का शुक्रिया अदा किया।

कहानी का संदेश:

मौज-मस्ती जरूरी है, लेकिन जिम्मेदारी और मेहनत से ही जीवन सुखद बनता है।
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