एक बार एक शिकारी जंगल में शिकार करने के लिए गया। उसने दिनभर मेहनत की, लेकिन कोई शिकार हाथ नहीं लगा। अंत में उसे एक कबूतर दिखाई दिया। शिकारी ने बड़ी चतुराई से जाल बिछाया और कबूतर को फंसा लिया। खुश होकर वह कबूतर को लेकर घर लौटने लगा।
रास्ते में कबूतर ने शिकारी से कहा, "तुम मुझे क्यों मारना चाहते हो? मेरा जीवन भी उतना ही कीमती है जितना तुम्हारा।" शिकारी मुस्कुराया और कहा, "तुम मेरे भोजन का साधन हो। अगर मैं तुम्हें नहीं मारूंगा, तो भूखा मर जाऊंगा।"
कबूतर ने बड़ी नम्रता से उत्तर दिया, "यदि तुम मुझे जीवित छोड़ दोगे, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं। मैं तुम्हें ऐसा उपाय बताऊंगा जिससे तुम रोज़ भरपेट भोजन कर सकोगे।"
शिकारी ने थोड़ी देर सोचा और कहा, "ठीक है, बताओ। अगर तुम्हारा उपाय सच में काम करेगा, तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।"
कबूतर ने शिकारी को जंगल के एक खास हिस्से में जाने को कहा, जहां कई फलदार पेड़ थे। उसने बताया कि वहां के फलों को बेचकर वह आसानी से जीवनयापन कर सकता है। शिकारी ने कबूतर की बात मानी और उसे छोड़ दिया। फिर वह कबूतर के बताए स्थान पर गया और सचमुच वहाँ बहुत सारे फल पाए। उसने फलों को बाजार में बेचकर अच्छा पैसा कमाया।
शिकारी को इस बात का एहसास हुआ कि दया और समझदारी से किसी की जान बचाने में भी लाभ हो सकता है। उसने निश्चय किया कि अब वह शिकार नहीं करेगा और अपने जीवनयापन के लिए ईमानदारी से मेहनत करेगा।
सीख:
यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में दया और समझदारी से काम लेना चाहिए। दूसरों की मदद करना न केवल उनके लिए बल्कि हमारे लिए भी लाभकारी हो सकता है।
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