एक बार की बात है, एक गांव में एक गरीब
रहता था। उसका नाम रामू था। वह ईमानदार और मेहनती था, लेकिन किस्मत अक्सर उसका साथ नहीं देती थी। उसकी एक छोटी-सी खेती थी, और वह किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करता था।
गांव के पास एक तालाब था, जिसमें बहुत सारे कमल के फूल खिले रहते थे। रामू को फूल तोड़ने का शौक था, लेकिन तालाब की गहराई और उसमें छिपे खतरों की वजह से गांव के लोग उसे मना करते थे।
तालाब का खजाना
एक दिन रामू खेत से लौटते वक्त तालाब के पास रुका। उसने सोचा, "आज मैं तालाब से कुछ कमल तोड़कर घर ले जाऊं।" जैसे ही वह पानी में उतरा, अचानक उसे पानी में कुछ चमकती हुई चीज नजर आई।
रामू ने सोचा, "शायद यह सोना है!" उसने झट से वह चमकती चीज निकाली। वह सच में एक सोने का सिक्का था। रामू बेहद खुश हुआ और उसने बाकी सिक्के भी खोजने का फैसला किया।
कुछ ही देर में उसने कई सिक्के निकाल लिए। रामू सोचने लगा, "अगर मैं ये सिक्के राजा को दे दूं, तो शायद मेरी किस्मत बदल जाए।"
सच और इनाम
अगले दिन रामू राजा के दरबार में पहुंचा और उसे सारी बात बताई। राजा ने सिक्के देखकर पूछा, "तुम्हें ये सिक्के कहां से मिले?"
रामू ने ईमानदारी से जवाब दिया, "महाराज, ये मुझे तालाब में मिले। शायद यह किसी पुराने समय का खजाना है। मैं इसे आपको सौंप रहा हूं, क्योंकि यह राज्य की संपत्ति हो सकती है।"
राजा उसकी ईमानदारी से प्रभावित हुआ और कहा, "रामू, तुमने सच बोलकर अपनी गरीबी को ताक पर रखा। मैं तुम्हारी सच्चाई की कद्र करता हूं। यह खजाना राज्य का है, लेकिन मैं तुम्हें इनाम में इसका चौथाई हिस्सा दूंगा।"
रामू को इनाम मिला और उसकी जिंदगी बदल गई। उसने अपनी ईमानदारी से यह साबित कर दिया कि सच हमेशा कड़वा नहीं होता; यह कभी-कभी जीवन में सबसे मीठा फल देता है।
शिक्षा
सच्चाई और ईमानदारी वह गुण हैं जो व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में ऊंचा उठाते हैं।google.com, pub-9937615590363233, DIRECT, f08c47fec0942fa0
0 Comments