बहुत समय पहले, एक घने जंगल के पास एक छोटा-सा गाँव था। उस गाँव में एक चोर रहता था, जिसका नाम रघु था। रघु बहुत चालाक और होशियार था। उसने कई जगहों पर चोरी की थी, लेकिन उसे कभी पकड़ा नहीं गया।
एक दिन, रघु को पता चला कि जंगल के बीचों-बीच एक रहस्यमयी गुफा है, जहाँ अपार खजाना छुपा हुआ है। लेकिन उस गुफा का दरवाजा सिर्फ सही मंत्र बोलने पर खुलता था। रघु को लगा कि यह खजाना पाने का मौका है। उसने कई गाँववालों से गुफा के बारे में पूछा, लेकिन किसी को सही मंत्र नहीं पता था।
फिर उसने फैसला किया कि वह खुद गुफा तक जाएगा और उस रहस्य को सुलझाएगा।
गुफा का रहस्य
रघु रात के समय जंगल में गया और गुफा तक पहुँचा। गुफा का दरवाजा बहुत बड़ा और पत्थर का बना हुआ था। उस पर अजीब-सी आकृतियाँ और लेखन खुदे हुए थे। रघु ने ध्यान से देखा और महसूस किया कि लेखन कोई प्राचीन भाषा में है। अचानक उसे दरवाजे के पास एक बूढ़ा साधु दिखा।
साधु ने कहा, "बेटा, इस गुफा का खजाना किसी लालची के लिए नहीं है। यह केवल उसी को मिलेगा, जिसके इरादे नेक हों।"
रघु ने झूठ बोलते हुए कहा, "मैं इस खजाने का इस्तेमाल गरीबों की मदद के लिए करना चाहता हूँ।"
साधु मुस्कुराया और बोला, "अगर तुम सच्चे हो, तो गुफा का दरवाजा तुम्हारे लिए खुद खुल जाएगा। मंत्र है, 'सच्चाई का द्वार खोलो।'"
रघु ने मंत्र बोला, और गुफा का दरवाजा सचमुच खुल गया। अंदर खजाना चमचमा रहा था—सोने के सिक्के, जवाहरात और बहुमूल्य मूर्तियाँ। लेकिन जैसे ही रघु ने सोने के सिक्कों को छूने की कोशिश की, गुफा कांपने लगी और दरवाजा धीरे-धीरे बंद होने लगा।
चोर का सबक
रघु घबरा गया। उसने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा लगभग बंद हो चुका था। आखिरी पल में वह किसी तरह बाहर कूद गया।
बाहर खड़े साधु ने कहा, "देखा, लालच का नतीजा क्या होता है? अगर तुम्हारे इरादे सच्चे होते, तो गुफा तुम्हें खजाना लेने देती।"
रघु को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने साधु से माफी माँगी और वादा किया कि वह अब चोरी नहीं करेगा।
उस दिन के बाद, रघु ने अपना जीवन बदल दिया और ईमानदारी से काम करने लगा।
शिक्षा
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लालच और झूठे इरादे कभी सफल नहीं होते। सच्चाई और ईमानदारी से ही जीवन में सफलता मिलती है।
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