एक छोटे से गाँव में एक पुराना किला खड़ा था, जिसे लोग "सुनसान किला" कहते थे। किला काफी समय से वीरान पड़ा था, और उसके बारे में गाँव में कई डरावनी कहानियाँ फैली हुई थीं। कहते थे कि रात को किले में अजीब-सी आवाजें आती थीं और एक परछाईं घूमती थी, जिसे कोई देख नहीं पाता था, लेकिन महसूस जरूर करता था।
गाँव में एक लड़का था, विजय, जो इन कहानियों पर विश्वास नहीं करता था। एक दिन उसने सोचा, "यह सब सिर्फ अफवाहें हैं। मुझे किले का रहस्य खुद जानना चाहिए।" विजय ने ठान लिया कि वह रात को किले में जाएगा और सबका भ्रम दूर करेगा।
रात का समय था, जब विजय अकेला किले की ओर बढ़ा। किले में घुसते ही उसे एक सर्द हवा का झोंका महसूस हुआ, और उसकी त्वचा पर झुरझुरी सी होने लगी। लेकिन विजय ने सोचा कि यह सब बस मन का डर है। वह आगे बढ़ता गया, और किले के भीतर घना अंधेरा छा गया।
विजय ने अपनी टॉर्च जलाई, लेकिन उसकी रोशनी भी बहुत धीमी पड़ने लगी। तभी अचानक किले के एक कमरे से एक आवाज़ आई, जैसे कोई धीरे-धीरे चल रहा हो। विजय ने आवाज़ की दिशा में अपनी टॉर्च घुमाई, लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
विजय ने डरते हुए कहा, "क-क कौन है?" पर कोई जवाब नहीं आया। फिर उसने एक कदम और बढ़ाया, और उसके सामने एक कटा-फटा दरवाजा दिखा। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, वह अजीब-सी परछाईं सामने आई। परछाईं का चेहरा नहीं था, बस एक धुंधला सा रूप था। विजय ने चिल्लाया, "त-तुम कौन हो?"
परछाईं एक कदम और बढ़ी, और उसकी आँखों में एक भयावह चमक थी। विजय ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं और पीछे हटने की कोशिश की। लेकिन वह परछाईं उसके सामने खड़ी थी और धीरे-धीरे उसके पास आने लगी। विजय ने भागने की कोशिश की, लेकिन किले के रास्ते जैसे बंद हो गए थे। वह किसी अजीब ताकत के जाल में फंस चुका था।
इतनी देर में विजय ने महसूस किया कि वह परछाईं केवल हवा में घुल रही थी। अचानक उस परछाईं ने एक खौ़फनाक आवाज़ में कहा, "यह किला मेरा है, तुम यहाँ क्यों आए हो?" विजय घबराते हुए बोला, "म-मुझे जाने दो!"
कुछ देर बाद, जैसे ही विजय ने एक अंतिम प्रयास किया और पूरी ताकत से बाहर जाने के लिए दौड़ा, दरवाजा अपने आप खुल गया। वह किले से बाहर भागते हुए, कभी पलटकर नहीं देखा।
अगले दिन, विजय ने गाँव वालों को बताया कि वह किले में जो परछाईं थी, वह किसी आत्मा का हिस्सा थी, जो किले में फंसी हुई थी। विजय ने यह भी कहा कि कभी भी उस किले के पास जाने का सोचने से पहले, हमें पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए।
शिक्षा: कभी-कभी अजनबी जगहों पर जाने से पहले सोचना चाहिए कि वहाँ का रहस्य और खौ़फ क्या हो सकता है।
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