यह कहानी एक सुनसान रेलवे स्टेशन की है, जिसे लोग "मृत स्टेशन" कहते थे। यह स्टेशन शहर से दूर, एक जंगल के बीच में था, और वहां से आखिरी ट्रेन कई साल पहले गुजरी थी। स्टेशन को लेकर कहा जाता था कि रात को वहां अजीब घटनाएं होती हैं।
रवि नाम का एक पत्रकार इस स्टेशन के रहस्य को जानने के लिए वहां गया। वह स्टेशन के पास रात बिताने का फैसला करता है। उसके पास सिर्फ एक कैमरा और एक टॉर्च थी।
आधी रात हो चुकी थी, और स्टेशन पर सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक, रवि को ट्रेन की सीटी सुनाई दी। उसने सोचा कि यह उसकी कल्पना है, क्योंकि उस ट्रैक पर सालों से कोई ट्रेन नहीं चली थी। लेकिन तभी उसने देखा कि स्टेशन के एक कोने पर एक पुरानी, जर्जर ट्रेन खड़ी है।
रवि ने हिम्मत जुटाई और उस ट्रेन के अंदर झांकने गया। ट्रेन के डिब्बों में उसे लोग बैठे हुए दिखाई दिए, लेकिन उनके चेहरे धुंधले थे। जैसे ही वह एक डिब्बे में दाखिल हुआ, ट्रेन की बत्तियां झपकने लगीं, और एक डरावनी आवाज गूंजी, "तुमने यहां आकर गलती की है।"
डर के मारे रवि ने कैमरा चालू किया और चारों ओर देखा। तभी उसे महसूस हुआ कि कोई उसके पीछे खड़ा है। जब उसने पीछे मुड़कर देखा, तो एक औरत सफेद साड़ी में खड़ी थी। उसका चेहरा पूरी तरह जला हुआ था।
औरत ने चीखते हुए कहा, "यह ट्रेन मृतकों की है। जिंदा लोग यहां नहीं आ सकते।" रवि की टॉर्च अचानक बंद हो गई, और चारों ओर अंधेरा छा गया। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन के दरवाजे अपने आप बंद हो गए।
जब वह अगली सुबह होश में आया, तो वह स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पड़ा था। उसका कैमरा टूटा हुआ था, और उसके हाथ में एक पुरानी टिकट थी, जिस पर लिखा था, "यहां से वापस मत आना।"
रवि उस दिन के बाद कभी नॉर्मल नहीं हो पाया। लोग कहते हैं कि वह ट्रेन आज भी रात के 3 बजे स्टेशन पर आती है, लेकिन सिर्फ उन लोगों को दिखाई देती है जो मौत के करीब होते हैं।
क्या आप कभी उस स्टेशन पर जाने की हिम्मत करेंगे?
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