चालाक लोमड़ी और बेवकूफ कौआ


एक घने जंगल में एक कौआ रहता था। वह बहुत चतुर तो नहीं था, लेकिन अपनी समझदारी पर उसे बहुत घमंड था। एक दिन वह कहीं से एक रोटी का टुकड़ा लेकर आया और पेड़ की एक ऊँची शाखा पर बैठ गया।

उसी जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। उसने कौए के पास रोटी देखी, तो उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने सोचा, "इस रोटी को मुझसे बेहतर कोई और नहीं खा सकता।"

लोमड़ी ने तुरंत कौए के पास जाकर मीठी आवाज़ में कहा, "ओ प्यारे कौए! क्या बात है, आज तो तुम बहुत सुंदर दिख रहे हो। तुम्हारे काले पंख तो मोर से भी ज़्यादा चमकदार हैं।"

कौआ लोमड़ी की बातों को सुनकर खुश हो गया। उसने मन ही मन सोचा, "यह लोमड़ी सच कह रही है। मैं वाकई बहुत सुंदर हूँ।"

लोमड़ी ने फिर कहा, "प्यारे कौए! मैंने सुना है कि तुम्हारी आवाज़ बहुत मधुर है। क्या तुम एक गाना गाकर मुझे सुनाओगे?"

कौआ लोमड़ी की मीठी बातों में फँस गया और उसने गाने के लिए जैसे ही अपनी चोंच खोली, रोटी नीचे गिर गई। लोमड़ी ने तुरंत रोटी उठाई और हँसते हुए बोली, "धन्यवाद, प्यारे कौए! तुम्हारी मूर्खता ने मेरा पेट भर दिया।"

यह कहकर लोमड़ी वहाँ से भाग गई। कौआ अपने मूर्खता पर पछताने लगा और सोचने लगा कि "मीठी बातों पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए।"

शिक्षा:
चापलूसी और मीठी बातों से सावधान रहें।

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