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एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में रघु नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त था। उसके पास बहुत कम साधन थे, लेकिन उसका दिल भक्ति और सच्चाई से भरा हुआ था। दिनभर खेतों में मेहनत करने के बाद, वह रात को भगवान श्रीकृष्ण के सामने बैठकर भजन गाता और उनसे बात करता।
रघु का मानना था कि भगवान हमेशा उसके साथ हैं। लेकिन गांव के कुछ लोग उसका मजाक उड़ाते थे और कहते थे, "भगवान गरीबों की नहीं सुनते। वह तो अमीरों और बड़े लोगों के पास रहते हैं।"
रघु उनकी बातों की परवाह किए बिना, अपनी भक्ति में लीन रहता। एक बार भयंकर अकाल पड़ा। खेत सूख गए, फसल बर्बाद हो गई। रघु के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा। लेकिन उसकी भक्ति में कोई कमी नहीं आई।
एक रात, जब रघु भगवान के सामने बैठकर प्रार्थना कर रहा था, तो उसने कहा, "हे कृष्ण! मैं जानता हूं कि आप हर हाल में मेरे साथ हैं। बस इतना आशीर्वाद दें कि मैं कभी आपकी भक्ति से दूर न होऊं।"
अचानक, दरवाजे पर दस्तक हुई। रघु ने दरवाजा खोला तो एक साधु खड़ा था। साधु ने कहा, "बेटा, मैं भूखा हूं। क्या मुझे कुछ खाने को मिलेगा?"
रघु ने विनम्रता से कहा, "महाराज, मेरे पास तो कुछ भी नहीं है। लेकिन आप बैठें, मैं कुछ व्यवस्था करता हूं।" उसने घर में बचा हुआ थोड़ा सा अनाज लाकर साधु को दे दिया।
साधु ने अनाज ग्रहण किया और मुस्कुराते हुए कहा, "रघु, तेरा विश्वास तुझे कभी निराश नहीं करेगा।" यह कहकर साधु गायब हो गया और वहां एक बर्तन में अनाज से भरा खजाना प्रकट हो गया।
रघु समझ गया कि यह भगवान श्रीकृष्ण की लीला थी। उसने अपने गांव के लोगों को यह बात बताई और कहा, "भक्ति और सच्चा विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। भगवान हर किसी के साथ हैं, बस हमें उन्हें अपने दिल में महसूस करना है।"
इस घटना के बाद, रघु और भी ज्यादा भक्तिमय हो गया, और पूरे गांव में उसकी भक्ति और भगवान की कृपा की कहानी फैल गई।
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