एक समय की बात है, कुबेर देवता धन के देवता थे। वे बहुत अहंकारी हो गए थे। अपनी धन-दौलत पर घमंड करते थे। वे हमेशा यह सोचते थे कि वे सबसे अमीर हैं और कोई भी उनसे अमीर नहीं हो सकता।
माता लक्ष्मी कुबेर के इस अहंकार से बहुत दुखी थीं। उन्होंने कुबेर को समझाया कि धन तो मात्र एक साधन है, इससे कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए। लेकिन कुबेर ने उनकी बात नहीं मानी।
तब माता लक्ष्मी ने कुबेर से कहा, "अगर तुम सच में धन के देवता हो तो मुझे एक परीक्षा दो।"
कुबेर ने कहा, "ठीक है, तुम मुझे परीक्षा दो।"
माता लक्ष्मी ने कुबेर से कहा, "तुम अपनी सारी धन-दौलत एक दिन के लिए मुझे दे दो।"
कुबेर ने बिना कुछ सोचे-समझे अपनी सारी धन-दौलत माता लक्ष्मी को दे दी।
माता लक्ष्मी ने कुबेर की सारी धन-दौलत ले ली और उसे एक पल में नष्ट कर दिया।
कुबेर बिना धन के रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने माता लक्ष्मी से क्षमा मांगी।
माता लक्ष्मी ने कुबेर को क्षमा कर दिया और उसे फिर से धन दिया। लेकिन इस बार उन्होंने कुबेर को समझा दिया कि धन का सही उपयोग कैसे करना चाहिए।
कहानी का संदेश:
यह कहानी हमें सिखाती है कि धन-दौलत तो मात्र एक साधन है, इससे कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए। हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए और दान पुण्य करना चाहिए।
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