सीता-राम के विवाह से जुड़ा किस्सा है। जब श्रीराम और सीता का विवाह हो रहा था, तब अयोध्या से राजा दशरथ अपने नगर वासियों के साथ बारात लेकर जनकपुर आ चुके थे। उस समय मिथिला के लोग अपशब्द कहने में बड़े माहिर थे। जनकपुर में बारात आई हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि छः प्रकार से बने हुए कई व्यंजन बारातियों को परोसे गए थे। जब बाराती भोजन कर रहे थे, उस समय जनकपुर की स्त्रियां अपने मधुर कंठ से अवधपुर के स्त्रियों और पुरुषों का नाम लेकर अपशब्द गुनगुनाने लगी। उन अपशब्द को सुनकर दशरथ, राम और सभी राजकुमार हसने लगे। एक बार तो राजा जनक डर गए कि कहीं किसी बाराती को बुरा न लग जाए। उस समय राजा दशरथ बोले, इनके अपशब्द सुनकर हमें इसलिए अच्छा लग रहा है क्योंकि अवसर विवाह का है। अपशब्द का अर्थ होता है, व्यक्ति कुछ ऐसे अपशब्द कहता है, जिसमें सामने वाले की खिल्ली उड़ाई जाती है। या उसे अपमानित किया जाता है, लेकिन विवाह का प्रसंग हो तो अपशब्द भी भली लगती है।"
सीख राजा दशरथ ने हमें सीख दी है कि किसी खास अवसर पर अपशब्द भी ऐसे बोलना चाहिए कि उसमें व्यंग्य हो, तर्क हो, लेकिन किसी व्यक्ति का अपमान नहीं होना चाहिए। ध्यान रखें ऐसे अपशब्द को भूलकर भी न बोलें, जिससे सामने वाला व्यक्ति अपमानित होकर क्रोधित हो जाए। अपशब्द भी किसी को हंसा सकते हैं, ये
मिथिला वासियों ने उस समय हमें बताया
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