एक समय की बात है। एक छोटे से गाँव में मोहन नाम का एक युवक रहता था। मोहन का भगवान पर कोई विश्वास नहीं था। वह हमेशा तर्क करता और कहता, "भगवान अगर हैं, तो मुझे दिखाओ। जब तक मैं उन्हें देख नहीं लेता, मैं विश्वास नहीं करूंगा।"
गाँव के संत उसे समझाने की कोशिश करते, लेकिन मोहन अपनी बात पर अड़ा रहता। एक दिन संत ने सोचा कि इसे सच्चाई का एहसास कराना होगा।
संत ने मोहन को बुलाया और कहा, "तुम सच में भगवान को देखना चाहते हो?"
मोहन ने उत्सुकता से कहा, "हाँ, अगर भगवान हैं तो मुझे दिखाओ।"
संत उसे गाँव के तालाब के पास ले गए और बोले, "तुम पानी में देखो, तुम्हें भगवान जरूर दिखेंगे।" मोहन ने जैसे ही पानी में झाँका, उसने अपनी ही परछाई देखी।
वह बोला, "यह तो मैं हूँ। भगवान कहाँ हैं?"
संत मुस्कुराए और बोले, "यही तो बात है। भगवान तुम्हारे अंदर ही हैं। जब तुम अपने कर्म सही रखोगे और दूसरों की भलाई के लिए काम करोगे, तब तुम्हें भगवान का अस्तित्व महसूस होगा।"
मोहन ने सोचा और महसूस किया कि संत सही कह रहे हैं। उसने अपनी सोच बदल दी और अच्छे काम करने का निश्चय किया। धीरे-धीरे उसे हर जगह भगवान का अनुभव होने लगा।
कहानी का संदेश
भगवान हर जगह और हर किसी में मौजूद हैं। हमें उन्हें अपने अंदर और दूसरों के प्रति अच्छे कर्मों में देखना सीखना चाहिए। खुद को और अपनी सोच को शुद्ध बनाकर हम भगवान के करीब पहुँच सकते हैं।
0 Comments