श्री कृष्ण के परम भक्त जस्सू जी की अद्भुत कथा
एक समय की बात है। वृंदावन के समीप एक छोटे से गाँव में जस्सू जी नाम के एक महान भक्त रहते थे। उनका हृदय श्रीकृष्ण की भक्ति में इतना लीन था कि उनका प्रत्येक क्षण भगवान के नाम-स्मरण में ही व्यतीत होता। सुबह से लेकर रात तक, हर पल उनके होठों पर "श्रीकृष्ण" का नाम रहता। गाँव के लोग उन्हें प्यार से "भक्त जस्सू" कहते थे।
भक्ति में लीन जीवन
जस्सू जी न तो धन-संपत्ति की चिंता करते, न ही अपने भोजन की। वे केवल ठाकुर जी की सेवा में ही लगे रहते। वे अक्सर कहते— "मेरा पालनहार स्वयं श्रीकृष्ण हैं, मुझे किसी और की चिंता नहीं।" यही कारण था कि वे दिनभर वृंदावन के कुंज गलियों में भगवान के नाम का गुणगान करते फिरते।
ईश्वर पर अटूट विश्वास
एक बार की बात है। गाँव में भयंकर अकाल पड़ा। न अन्न था, न जल, और लोग भूख-प्यास से बेहाल थे। जस्सू जी भी कई दिनों से भूखे थे, लेकिन उनके मुख से एक बार भी शिकायत का शब्द नहीं निकला। वे बस मुस्कुराते हुए कहते— "राधा रानी की कृपा से सब ठीक होगा।"
गाँव वालों ने देखा कि जस्सू जी बिलकुल चिंतामुक्त हैं, जबकि पूरा गाँव संकट में था। लोगों ने उनसे पूछा— "भक्त जस्सू, तुम इतने निश्चिंत कैसे हो?"
उन्होंने मुस्कुराकर उत्तर दिया— "मेरा कान्हा मुझे भूखा नहीं रहने देगा। बस देखते जाओ, उसकी लीला कितनी अद्भुत होती है।"
भगवान की कृपा
उसी रात, एक सुंदर बालक गाँव में आया। वह सिर पर एक बड़ी टोकरी लिए हुए था, जिसमें मीठे-मीठे फल और रोटी थीं। वह सीधा जस्सू जी के पास पहुँचा और बोला— "बाबा, ये लो! श्रीकृष्ण ने आपके लिए भेजा है।"
जस्सू जी ने जब बालक को देखा, तो उनकी आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने प्रेम से भोजन लिया और बालक को गले से लगा लिया। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी आँखें बंद कीं और श्रीकृष्ण का नाम लिया, वह बालक वहाँ से अदृश्य हो गया।
गाँव के लोग यह देखकर अचंभित रह गए। तब उन्हें समझ आया कि वह कोई साधारण बालक नहीं था, बल्कि स्वयं श्रीकृष्ण ही थे, जो अपने भक्त को दर्शन देने आए थे।
भक्ति का सच्चा अर्थ
इस चमत्कार के बाद गाँव में यह संदेश फैल गया कि सच्ची भक्ति करने वाले को भगवान कभी भूखा नहीं रहने देते। भक्त जस्सू का विश्वास और भी दृढ़ हो गया, और वे पहले से भी अधिक भक्ति में लीन हो गए।
यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति करने वालों के लिए भगवान स्वयं प्रकट होते हैं और उनकी हर आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं। श्रीकृष्ण अपने भक्तों को कभी भी संकट में नहीं छोड़ते।
राधे-राधे!
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