https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233लंका युद्ध के दौरान, मेघनाद ने अपने शक्तिशाली बाण से लक्ष्मण जी को मूर्छित कर दिया, जिससे पूरा रामदल चिंता में पड़ गया। वैद्यराज सुषेण ने कहा कि लक्ष्मण जी को बचाने के लिए "संजीवनी बूटी" चाहिए, जो केवल हिमालय पर्वत पर मिल सकती है।
भगवान हनुमान बिना विलंब किए आकाश में उड़ चले और रातों-रात हिमालय पहुँचे। वहाँ पहुँचकर वे संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए। समय कम था, इसलिए उन्होंने संपूर्ण द्रोणागिरी पर्वत को ही उठा लिया और रामदल में वापस आ गए।
https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-9937615590363233सुषेण वैद्य ने बूटी को पीसकर लक्ष्मण जी पर लगाया, जिससे वे तुरंत स्वस्थ हो गए। इस चमत्कार को देखकर सभी भक्त और सैनिक हनुमान जी की जय-जयकार करने लगे।
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