स्वामी रामतीर्थ के पास एक व्यक्ति बैठा था। उसने स्वामी जी से पूछा- स्वामी जी कितना बजा है? स्वामी जी ने कहा एक बजा है। एक घंटे बाद उस व्यक्ति ने फिर पूछा स्वामी जी क्या बजा है? उन्होंने फिर कहा एक बजा है। ये व्यक्ति बड़ा हैरान हुआ और बोला स्वामी जी कहीं आपकी घड़ी तो खराब नहीं हो गईं है? जो हमेशा एक ही बजा रही है। स्वामी जी मुस्कुराए और बोले सारे जगत में एक ही तो बज रहा है। सारे जगत में उस ईश्वर का ही तो राज है। अतः वो ही बज रहा है, उसके ही नाम का डंका बज रहा है। अतः वो एक ही बज रहा है। ठाकुर रामकृष्ण परमहंस से किसी ने पूछा- कोई आदमी बहुत धनवान हो तो उसकी क्या कीमत है आपकी नजर में? वो बोले-शून्य। उस व्यक्ति ने फिर पूछा कोई बहुत विद्वान हो तो ? तो भी शून्य। कोई आदमी अत्यधिक बलशाली हो तो ? उन्होंने फिर कहा-शून्य। इस तरह वो आदमी पूछता गया और ये सबकी कीमत शून्य बताते गए। अंत में उस व्यक्ति ने पूछा यदि स्वामी जी कोई व्यक्ति बलशाली हो, विद्वान हो, धनवान हो, सुंदर हो सब कुछ हो तो ? रामकृष्ण ने कहा शून्य। शून्य को अगर शून्य से गुणा करेंगे तो शून्य ही आएगा। इन सबकी कीमत तब है जब शून्य के आगे एक लग जाए। ऐसे ही जब तक परमात्मा के नाम का एक नहीं लगेगा सब बेकार है। अगर किसी के जीबन में भक्ति नहीं है, धार्मिकता नहीं है तो चाहे वो कुछ भी हो सब बेकार है
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